November 8, 2026 |

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मनरेगा से आत्मनिर्भर बने रामदास,,,सिंचाई सुविधा ने खोले समृद्धि के द्वार…

बलरामपुर। ग्रामीण विकास अंतर्गत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। वाड्रफनगर जनपद की ग्राम पंचायत पनसरा निवासी रामदास इसका जीवंत उदाहरण है, जहाँ मनरेगा अंतर्गत बने एक कुएं ने न केवल सिंचाई की समस्या का समाधान किया, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।


       वाड्रफनगर जनपद के ग्राम पंचायत पनसरा निवासी रामदास के परिवार की कहानी ग्रामीण आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल बन चुकी है। कभी कृषि और मजदूरी पर निर्भर यह परिवार आज अपनी मेहनत और मनरेगा के सहयोग से आर्थिक रूप से सशक्त हो गया है। पूर्व में सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने के कारण रामदास खेती को पर्याप्त समय नहीं दे पाते थे। वर्षा पर निर्भर खेती के कारण सीमित उत्पादन होता था और परिवार की आजीविका मुख्यतः मनरेगा मजदूरी तक सीमित थी। ऐसे में ग्राम सभा के माध्यम से जब उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत कुआं निर्माण की जानकारी मिली, तो उन्होंने अपनी भूमि पर कुआं निर्माण हेतु आवेदन किया। वर्ष 2023-24 में रामदास को 2 लाख 70 हजार रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई, जिससे उनकी 2.50 एकड़ भूमि पर कुएं का निर्माण किया गया। कुआं बनते ही उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया। अब खेतों को नियमित सिंचाई मिलने लगी और वे खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों की खेती भी करने लगे। आज श्री रामदास अपनी भूमि पर धान के साथ सरसों जैसी तिलहन फसलों की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा आलू, गोभी, टमाटर सहित विभिन्न सब्जियों की खेती से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि घर में पोषणयुक्त सब्जियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित हुई है। अतिरिक्त उत्पादन को बाजार में बेचकर परिवार को अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।
श्री रामदास का कहना है कि मनरेगा ने हमें आत्मनिर्भर बनाया है। अब मजदूरी की मजबूरी नहीं रही। खेतों में सालभर खेती हो रही है। मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आजीविका के स्थायी साधनों का सृजन कर रही है।जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने के साथ लाखों परिवारो आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।

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