लोकनिर्माण विभाग में भारी भर्राशाही,बिना गड्ढे भरे ही पानी में केमिकल डालकर कराया जा निर्माण,,,प्रशासन की उदासीनता से लोकनिर्माण विभाग के हौसले बुलंद…

जितेंद्र सोनी की रिपोर्ट
जशपुर। लोकनिर्माण विभाग पत्थलगांव द्वारा कोतबा से बागबहार मार्ग में कराए जा रहे कार्यों में भारी अनियमितता बरती जा रही है।निर्माण कार्य मे भ्रष्टाचार इतना कि विभाग में पदस्थ इंजीनियर पारस कैथल द्वारा ठेकेदार को लाभ पहुचाने खुद मुंशी रखकर नाबालिक स्कूली छात्रों से बिटूमेन इमल्सन की छिड़काव कर पानी भरे गड्डों में पैच रिपेयरिंग का कार्य करवाया जा रहा हैं।

जिले में पहली बार ऐसा अनियमितता देखी जा रही है जिसमे शासन के रुपयों को बंदरबाट करने की जानकारी प्रशासन को होने के बाद भी न कोई जांच न कार्यवाही की जा रही है इस बात से लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रहीं हैं। बिडंबना यह है कि जो कार्य गर्मियों में होना चाहिये उस कार्य को भरी बरसात के दिनों में कैमिकल डालकर किया जा रहा है जबकि सड़कों में गड्डे भरने के लिये गिट्टी मुरुम का उपयोग किया जाना होता है।
इस मामले को लेकर जब ग्राउंड रिपोर्टिंग किया गया तो पाया कि दो युवक ऐसे कार्य कर रहे थे जो स्कूली बच्चे थे और वे अध्यापन कार्य छोड़कर पैच कार्य में लगे हुए थे।जब हमारी टीम ने उनसे जानकारी लिया तो उन्होंने बताया कि उनके पिताजी कार्य करते है लेकिन इन दिनों खेती कार्य होने के कारण उनकी जगह पर कार्य करने आये हुए हैं। जब उनके मेहताना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने प्रत्येक दिवस 250 रुपये मिलने की बात कही।

मामले को लेकर विभागीय इंजीनियर पारस कैथल के द्वारा लगाए गये मुंशी कर्मचारी व अन्य लोगों से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस कार्य करने के लिये इंजीनियर के द्वारा रखा गया हैं।इससे यह बात सामने आती है कि जब उक्त कार्य को ठेकेदार को दिया गया है तो विभागीय इंजीनियर नाबालिक मजदूर और मुंशी लगाकर ठेकेदार पर क्यों मेहरबान हैं। इस बात से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि जिस तरह पूर्व में लैलूंगा से लवाकेरा और कोतबा से बागबहार तक 64 करोड़ सरकारी रुपयों का बंदरबाट कर दुरुपयोग किया गया हैं वो विभागीय लापरवाह कर्मचारियों के मिलीभगत से किया गया हैं।
हालांकि जब इंजीनियर पारस कैथल के दूरभाष नंबर पर कई बार फोन के माध्यम से संपर्क करना चाहा मगर वह फोन नहीं उठाया इससे स्पष्ट पता चलता है कि भ्रष्टाचार कितना अधिक है बहरहाल अब देखने वाली बात होगी कि इस पर अधिकारी क्या कार्यवाही करते हैं।



