
कुसमी| श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर रविवार को शक्तिधाम श्रीकोट आश्रम में संत गहिरा गुरु और मां पूर्णिमा के छाया चरणों एवं गुरुओं का चरण सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज व श्रद्धालुओं ने स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। जन्माष्टमी में यह एक धार्मिक और पारंपरिक उत्सव है जिसमें भक्त अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करते हैं। सुबह से ही श्रद्धालु पंक्तिबद्ध होकर उनके चरणों में शीश झुकाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। संत गाहिरा गुरु और मां पूर्णिमा, जिन्हें भक्त आध्यात्मिक गुरु मानते हैं, उनके प्रति भक्तों का प्रेम और सम्मान इस अवसर पर देखने को मिला।
आश्रम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शनिवार को दिनभर भक्ति और दर्शनों के बाद देर रात तक भजन-कीर्तन और प्रवचन का भी आयोजन किया गया। नगर समेत गांवों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाया गया। दही- हांडी होड़ में युवाओं का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। रंग- गुलाल के साथ ही श्रीकृष्ण कन्हैयालाल के जयकारे गूंज उठे। युवाओं ने पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ी तो पूरा माहौल श्रीकृष्णमयी हो गया। इस अवसर पर संत गहिरा गुरु और मां पूर्णिमा के छाया चरणों का स्पर्श करके सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज और भक्त- श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया। एवं धर्म और कर्म के मार्ग पर चलने के लिए आह्वान किया। सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने जन्माष्टमी की बधाई देते हुए कहा कि गुरु का स्थान भगवान के समान होता है और उनके प्रति समर्पण और श्रद्धा रखना आवश्यक है। जन्माष्टमी के अवसर पर संत गहिरा गुरु और मां पूर्णिमा के चरणों का स्पर्श करना एक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाला कार्यक्रम था, जो भक्तों के जीवन में प्रेम, श्रद्धा और सम्मान का संचार करता है। आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

मदगुरी के राधा-कृष्ण मंदिर में भी हुए पूजा-अर्चना
ग्राम मदगुरी स्थित राधा- कृष्ण मंदिर में भी लोगों ने भगवान के दर्शन किए। देर रात तक भजन कीर्तन पर श्रद्धालु खूब नाचे। वहीं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का समय होते ही युवाओं की टोलिया श्रीकृष्ण और भक्ति गीतों पर नाचने गाने लगे। ग्राम श्रीकोट आश्रम ने मटकी फोड़ कार्यक्रम में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। युवाओं की टोलियों ने गीतों पर नाचते हुए मटकी फोड़ में जुट गए। पिरामिड बनाकर कई बार नीचे गिरते और फिर उठते। कई बार प्रयासों के बाद मटकी फोड़ी और कृष्ण कन्हैयालाल के जयकारे गूंज उठे। लोगों ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की एक दूसरे को बधाई दी और प्रसाद देकर मुंह मीठा करवाया। इस अवसर पर नन्हे बच्चे श्रीकृष्ण का वेश धारण कर मटकी फोड़ में पहुंचे। युवा कृष्ण का वेश लिए बच्चों को कंधों पर उठाकर नाचे। रंग गुलाल के साथ बच्चों ने खूब मस्ती की।





