November 4, 2026 |

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ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान,डिजिटल रूप में संरक्षित होंगी जिले की ऐतिहासिक पांडुलिपियां

अभियान से जुड़कर विरासत संरक्षण में सहभागी बनने प्रशासन ने की अपील,योगदान देने वाले नागरिकों को किया जाएगा सम्मानित,ज्ञानभारतम पोर्टल से जुड़ कर अभियान का बन सकते हैं हिस्सा

बलरामपुर। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान की पहल की गई है। अभियान का उद्देश्य देश एवं राज्य में उपलब्ध प्राचीन एवं ऐतिहासिक पाण्डुलिपियों की सर्वे, सूचीकरण एवं संरक्षण सुनिश्चित करना है। जिसके अंतर्गत विभिन्न संस्थानों एवं निजी संग्रहों में संरक्षित पाण्डुलिपियों का व्यवस्थित सर्वेक्षण एवं डिजिटलीकरण किया जा रहा है। जिसमें पांडुलिपियों का स्वामित्व उनको धारण करने वाले व्यक्ति, परिवार और संस्था का ही रहेगा। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में भी कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान का क्रियान्वयन किया जा रहा हैं। जिसके लिए जिला एवं स्थानीय स्तर पर सर्वेक्षक का गठन किया गया है।
जिले वासियों से अपील की गई है कि यदि उनके पास ऐसी पांडुलिपियां हैं जो अब तक सर्वेक्षित नहीं हैं, या उन्हें किसी स्थान, परिवार या संस्था में पांडुलिपियों की जानकारी है, तो वे इस सर्वेक्षण से अवश्य जुडें एवं प्रशासन को अवश्य उपलब्ध कराएं। यह राष्ट्रीय अभियान हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसमें समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे नागरिक जिन्हें अपने आसपास पांडुलिपियों की जानकारी है, वे भी इस सर्वेक्षण से जुड़कर महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। जिन्हें जिला प्रशासन के द्वारा सम्मानित भी किया जाएगा।
नोडल अधिकारी श्री रामपथ यादव ने बताया कि इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने के लिए डिजिटल माध्यम ज्ञानभारतम पोर्टल भी लॉच किया गया है। कोई भी व्यक्ति या संस्था अपने पास उपलब्ध पांडुलिपियों को ज्ञानभारतम डॉट कॉम पोर्टल और ‘ज्ञानभारतम मोबाइल एप के माध्यम से आवश्यक जानकारी दर्ज कर इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। सर्वेक्षण के पश्चात सरकार इनका डिजिटाइजेशन और संरक्षण करेगी। पांडुलिपियों का स्वामित्व उनको धारण करने वाले व्यक्ति, परिवार और संस्था का ही रहेगा।
उन्होंने कहा है कि जिनके पास कोई प्राचीन ग्रंथ, पांडुलिपि या ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हों, तो वे इसकी सूचना जिला स्तरीय समिति को दें ताकि हमारी समृद्ध लोक-संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों के लिए डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जा सके।
गौरतलब है कि पाण्डुलिपियां हमारी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं बौद्धिक का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। इनमें प्राचीन ज्ञान, चिकित्सा, साहित्य, धर्म, विज्ञान एवं सामाजिक परंपराओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी निहित होती है। इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान संरक्षण के लिए कार्य करने में सहायक होगी। वर्तमान परिस्थितियों में जलवायु, कीट एवं अनुचित रख-रखाव के कारण पाण्डुलिपियां नष्ट हो सकती है। जिसके लिए इनका वैज्ञानिक संरक्षण एवं डिजिटिलिकरण करना आवश्यक हो गया है।

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