September 16, 2026 |

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डीएमएफ अंतर्गत बेस लाइन सर्वे हेतु जिला स्तरीय कार्यशाला संपन्न,,,220 ग्राम पंचायतों में होगा बेस लाइन सर्वे…

खनन प्रभावी क्षेत्र के विकास के लिए बनेगी पंचवर्षीय योजना

बलरामपुर जिला खनिज संस्थान न्यास अध्यक्ष एवं कलेक्टर राजेंद्र कटारा तथा सचिव एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर की उपस्थिति में जिला खनिज संस्थान बेस लाइन सर्वे हेतु आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।
       कलेक्टर राजेन्द्र कटारा ने कहा कि खनन प्रभावी क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए बेस लाईन सर्वे अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बेस लाईन सर्वे के आधार पर आगामी पांच वर्षों के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जिससे अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित किया जा सके। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय और कन्वर्जेंस के माध्यम से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री कटारा ने कहा कि 82 प्रत्यक्ष, 138 अप्रत्यक्ष कुल 220 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए कार्ययोजना तैयार की जानी है। उन्होंने हितग्राही वार जानकारी संकलित कर कार्ययोजना में शामिल करने की बात कही। ताकि वास्तविक हितग्राही तक लाभ पहुंच सकें। उन्होंने शासन की गाइडलाइन के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए।
      जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर ने कहा कि सर्वेक्षण कार्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में बेस लाईन सर्वे के साथ-साथ पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना और वार्षिक योजना तैयार की जाएगी। जिसमें विभिन्न विभागों के कार्यों को समाहित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों/ग्रामों में 9 मार्च तक सभी सर्वेक्षण दल का गठन करना है ताकि निर्धारित समय-सीमा में सर्वेक्षण कार्य शुरू किया जा सके। उन्होंने सभी अधिकारियों को गंभीरता के साथ कार्य करते हुए सर्वेक्षण कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा।


        इस दौरान अपर कलेक्टर आर.एन. पाण्डेय ने बताया कि बेस लाइन सर्वे के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय समिति का गठन किया गया है। सभी समितियां निर्धारित प्रारूप अनुसार अपने कार्यों एवं दायित्वों का निर्वहन करते हुए सर्वेक्षण कार्य को व्यवस्थित रूप से संपन्न करेंगे। कार्यशाला में जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर के द्वारा पीपीटी के माध्यम से विस्तृत जानकारी साझा की गई। उन्होंने बताया कि खनन प्रभावी क्षेत्रों के लिए सर्वे कर सामुदायिक भागीदारी एवं पारदर्शिता के साथ कार्ययोजना तैयार किया जाना है। जिसके अंतर्गत सर्वप्रथम क्षेत्र की पहचान कर बेस लाईन सर्वे किया जाएगा। डेटा संग्रहण कर गेप का परीक्षण किया जाएगा तत्पश्चात पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना एवं वार्षिक योजना तैयार की जाएगी। जिसमें खनिज संस्थान न्यास नियम के अनुसार न्यास के प्राप्त उपलब्ध निधि का न्यूनतम 70 प्रतिशत उच्च प्राथमिकता के क्षेत्रों में एवं 30 प्रतिशत की राशि अन्य प्राथमिकता के क्षेत्रों में उपयोग किया जाना है। जिसके अंतर्गत उच्च प्राथमिकता क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के उपाय, स्वास्थ्य एवं देखभाल, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, वृद्ध एवं दिव्यांगजन कल्याण, कौशल विकास और आजीविका सृजन, स्वच्छता, आवास, कृषि, पशुपालन एवं अन्य प्राथमिकता क्षेत्र में भौतिक अधोसंरचना, सिंचाई, ऊर्जा और वाटरशेड विकास जैसे कार्य शामिल है। कार्यशाला में बताया गया कि खनन प्रभावित प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष क्षेत्र में जनसंख्या के आधार पर न्यूनतम 10 प्रतिशत जनसंख्या से डीएमएफ अंतर्गत निर्धारित उच्च प्राथमिकता/अन्य प्राथमिकता के क्षेत्रों से संबंधित कार्यों का रणनीति तैयार करना है। जिसमें ऐसे कार्यों का समायोजन करना है जिसमें खनन प्रभावी क्षेत्र एवं हितग्राही का समुचित विकास हो।
कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियो को 04 समूह में बांटकर उनके द्वारा 05 वर्ष की कार्ययोजना का निर्माण कर सामूहिक रूप से प्रस्तुतिकरण किया गया, जिससे सभी प्रतिभागियों का साझा समझ विकसित हो सके। जिला स्तरीय कार्यशाला में जिला स्तरीय समिति एवं विकासखण्ड स्तरीय समिति, मास्टर ट्रेनर्स उपस्थित थे।

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