कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी नामांतरण का मामला,,,अधिकारियों पर मिली भगत का आरोप…

राजपुर। कूट रचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी नामांतरण के मामले में राजपुर तहसील एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर नामांतरण आदेश पारित किया गया हैं। इस पूरे मामले में हल्का पटवारी अजेन्द्र टोप्पो और नोटरी एवँ तहसीलदार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आमजन पहले से ही तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली से परेशान हैं। न तो पटवारी नियमित रूप से अपने हल्का मुख्यालय में बैठते हैं और न ही निवास करते हैं। इसके बावजूद, तहसीलदार और एसडीएम के संरक्षण में ये मनमर्जी से कार्य करते हैं।
ग्राम कोदौरा, तहसील राजपुर निवासी कबीर दास ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पटवारी अजेन्द्र टोप्पो, नोटरी और तहसीलदार की मिलीभगत से उनकी भूमि का फर्जी नामांतरण कर दिया गया।कबीर दास के स्वामित्व वाली भूमि खसरा नंबर: 129/1, 130, 133, 131, 132, 206 कुल रकबा: 0.2808, 0.0618, 0.4058, 0.0128, 0.7608, 0.10 हेक्टेयर इन सभी जमीनों पर अनावेदक सोमारु पिता रिझन निवासी बाबा पारा, तहसील प्रतापपुर ने फर्जी तरीके से कब्जा जमाने का प्रयास किया है। कबीर दास के अनुसार, 12 अगस्त 2025 को नोटरी के समक्ष उनकी अनुपस्थिति में एक फर्जी सहमति पत्र तैयार किया गया। इसके आधार पर पटवारी अजेन्द्र टोप्पो ने फर्जी प्रतिवेदन बनाकर सोमारु के नाम पर नामांतरण कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि अनावेदक सोमारु ग्राम कदोरा का निवासी भी नहीं है।कबीर दास ने कहा कि उन्हें इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब नामांतरण से संबंधित नोटिस प्राप्त हुआ। उन्होंने इस फर्जी और अवैध नामांतरण को निरस्त करने की मांग की है।
इस मामले में राजपुर तहसीलदार सालिक राम गुप्ता ने कहा कि आवेदक की शिकायत मिला है मामले की जाँच पश्चात निराकरण किया जाएगा।



