September 19, 2026 |

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कृषि मंत्री ने वन शहीद स्मारक का किया लोकार्पण,,,शहीद वन कर्मियों के बलिदान को किया नमन

बलरामपुर आदिम जाति विकास, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, मछली पालन, पशुधन विकास विभाग के मंत्री रामविचार नेताम बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रवास पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने वनमंडलाधिकारी कार्यालय परिसर में वन शहीद स्मारक का लोकार्पण किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। अन्य जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
       इस अवसर पर रेड क्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष ओम प्रकाश जायसवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, नगर पालिका अध्यक्ष लोधी राम एक्का, उपाध्यक्ष दिलीप सोनी, उपाध्यक्ष श्रीमती बबली देवी अन्य जनप्रतिनिधिगण,कलेक्टर राजेंद्र कटारा, पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर, वनमंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।


           मंत्री रामविचार नेताम ने आयोजित कार्यक्रम में वन शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि परिसर में निर्मित शहीद स्मारक उन वन कर्मियों के अदम्य साहस और बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने अपने कर्तव्य पालन के दौरान नक्सलियों के हाथों अपने प्राण न्यौछावर किए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं विषम परिस्थितियों में वनों और पर्यावरण की सुरक्षा करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। वन कर्मी विपरीत परिस्थितियों में भी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए वन संपदा और वन्य प्राणियों की रक्षा में जुटे रहते हैं। उन्होंने बताया कि अवैध कटाई, वनाग्नि, अवैध कब्जा और अवैध शिकार जैसी गतिविधियों से वनों को लगातार खतरा बना हुआ है, ऐसे में वन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने वन शहीदों के बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिया गया सर्वोच्च बलिदान सदैव प्रेरणा देता रहेगा।उन्होंने कहा कि वनों और पर्यावरण के कारण ही मानव जीवन संभव है, इसलिए इनकी रक्षा करना हम सभी का दायित्व है। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जंगलों पर आश्रित हैं, इसलिए वनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं से अनेक वनस्पतियां, औषधीय पौधे, जड़ी-बूटियां एवं वन्य प्राणी नष्ट हो रहे हैं, जो अत्यंत चिंता का विषय है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे वनों की रक्षा के लिए आगे आएं और अवैध कटाई, अवैध कब्जा एवं वनाग्नि जैसी गतिविधियों को रोकने में सहयोग करें।


         उन्होंने बढ़ती गर्मी के मौसम में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता बरतने तथा अमानवीय कृत्यों पर सख्ती से कार्रवाई करने की बात कही। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह पर्यावरण संरक्षण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करे और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं समृद्ध वन संपदा का संरक्षण करे।
कलेक्टर श्री राजेंद्र कटारा ने कहा कि आज का दिन गौरव का क्षण है, जब हम उन वन कर्मियों को स्मरण कर रहे हैं जिन्होंने अपने कर्तव्य निर्वहन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके सम्मान में परिसर में निर्मित यह शहीद स्मारक उनके साहस और समर्पण का प्रतीक है। कलेक्टर श्री कटारा ने कहा कि वन, राजस्व एवं पुलिस विभाग के समन्वित प्रयासों से वनों के संरक्षण के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप वनाग्नि की घटनाओं में कमी आई है तथा सूचना प्राप्त होते ही त्वरित कार्रवाई कर आग पर नियंत्रण पाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महुआ सीजन के दौरान वनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ग्रामीणों को भी सौंपी गई है, जिससे जनभागीदारी के माध्यम से संरक्षण को और सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने आसपास के नागरिकों को अवैध कटाई रोकने के लिए प्रेरित करने तथा पौधों के संरक्षण में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
कलेक्टर श्री कटारा ने कहा कि यह जिला हाथी विचरण क्षेत्र में आता है, ऐसे में ग्रामीणों को विशेष सतर्कता बरतते हुए वन कर्मियों का सहयोग करना चाहिए, जिससे जनहानि एवं आर्थिक क्षति से बचा जा सके। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि जिले में व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया गया है। इन पौधों का संरक्षण करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं संतुलित पर्यावरण मिल सके। उन्होंने कहा कि वनों का संरक्षण केवल शासन का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और सामूहिक प्रयासों से ही हम अपनी प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रख सकते हैं।


        वनमंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी ने कहा कि वन संपदा पृथ्वी की अमूल्य धरोहर है और इसकी रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले वन कर्मियों की स्मृति में प्रतिवर्ष वन शहीद दिवस मनाया जाता है। इसी कड़ी में आज वन शहीद स्मारक का लोकार्पण किया गया। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि वन मंडल में स्वर्गीय श्री रामजी राम जायसवाल (वनरक्षक) एवं स्वर्गीय श्री बीरेन्द्र कुमार सिन्हा (वनरक्षक) की वर्ष 2003 में नक्सलियों द्वारा हत्या कर दी गई थी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में वन माफियाओं, नक्सलियों एवं कर्तव्य निर्वहन के दौरान वन्य जीवों के हमलों में अब तक अनेक वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। प्रदेश में 35 तथा मध्यप्रदेश में 37 वन कर्मियों ने बलिदान दिया है। इन सभी की स्मृति में देशभर में प्रतिवर्ष 11 सितंबर को वन शहीद दिवस मनाया जाता है।
        वनमंडलाधिकारी बाजपेयी ने कहा कि वन केवल वृक्षों का समूह नहीं, बल्कि हमारे जीवन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार हैं। वनों की रक्षा के लिए वनकर्मी दिन-रात कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हैं। चाहे अवैध कटाई को रोकना हो, वन्यजीवों की सुरक्षा करना हो या वनाग्नि जैसी आपदाओं से निपटना हो, वनकर्मी सदैव तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कर्तव्यनिष्ठ और साहसी वनकर्मियों ने अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह वन शहीद स्मारक उनके त्याग, समर्पण और वीरता को चिरस्थायी बनाने का एक विनम्र प्रयास है। इस दौरान उन्होंने सभी नागरिकों को वन एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए वन संरक्षण में सहयोग करने के लिए प्रेरित किया।

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