June 6, 2026 |

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रामानुजगंज में मिली 96 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि,,,ज्ञानभारतम अभियान के तहत हुआ दस्तावेजीकरण…

पांडुलिपि में शारदा माता की भक्ति, कन्हर नदी की बाढ़ का ऐतिहासिक वृत्तांत और वंश-वृक्ष का चित्रण

बलरामपुर। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशव्यापी स्तर पर संचालित ज्ञानभारतम पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में बलरामपुर-रामानुजगंज के जिले में पहला पांडुलिपि रामानुजगंज मध्य बाजार निवासी श्री रामेश्वर प्रसाद गुप्ता के घर से 96 वर्ष पुरानी एक अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपि प्राप्त हुई है।
ज्ञानभारतम अभियान की जिला स्तरीय समिति के नोडल अधिकारी श्री रामपथ यादव, सहायक नोडल श्री संजय कुमार गुप्ता और जिला ग्रंथपाल श्री राजकुमार शर्मा ने श्री रामेश्वर गुप्ता परिवार के निवास पर पहुंचकर इस ऐतिहासिक पांडुलिपि का सूक्ष्म अवलोकन किया।


          पांडुलिपि के संरक्षक रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि यह अमूल्य धरोहर उनके दादाजी श्री लक्ष्मी प्रसाद रौनियार द्वारा आज से 96 वर्ष पूर्व हस्तलिखित की गई थी, जिसे परिवार ने आज तक बेहद सहेज कर रखा है। इसमें रामानुजगंज की जीवनदायिनी कन्हर नदी में आई ऐतिहासिक बाढ़ का सजीव वर्णन है। मां शारदा की भक्ति स्तुति, भैरवी, द्रौपदी का विनय, गजल, दोहा, चौगोला और दादरा जैसी विविध विधाओं का समावेश है। पांडुलिपि में अत्यंत कलात्मक ढंग से एक वंश-वृक्ष को भी चित्रित किया गया है।
अवलोकन के दौरान अधिकारियों ने पाया कि पांडुलिपि की हस्तलिपि और लेखन शैली की सुंदरता अत्यंत विशिष्ट और विस्मयकारी है। मौके पर मौजूद एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जगदलपुर) से आए प्रभारी अधिकारी श्री हरनेक सिंह ने इस दुर्लभ पांडुलिपि के दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर इसे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया।
ज्ञानभारतम अभियान देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति, पुरातात्विक धरोहरों और जनजातीय विरासत के संरक्षण व संवर्धन का एक महा-अभियान है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से जागरूक नागरिक स्वप्रेरणा से आगे आकर अपनी पारिवारिक व ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं।
      प्रशासन ने जिले के अन्य नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके पास कोई प्राचीन ग्रंथ, पांडुलिपि या ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हों, तो वे इसकी सूचना जिला स्तरीय समिति को दें ताकि हमारी समृद्ध लोक-संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों के लिए डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जा सके।

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