September 18, 2026 |

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एकीकृत कृषि प्रणाली से बहुआयामी कृषि अपनाकर आत्मनिर्भर हुई गाँव की ज्योति,,,प्रशिक्षण और तकनीक से आय में हुई तीन गुना वृद्धि…

बलरामपुर। जिले में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा वैज्ञानिक एवं लाभकारी खेती को बढ़ावा देने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र द्वारा संचालित प्रशिक्षण, प्रदर्शन कार्यक्रम एवं तकनीकी मार्गदर्शन में ग्राम केरिकाछार की महिला किसान श्रीमती ज्योति मुरुम ने एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाकर आत्मनिर्भरता की अग्रसर हुई है। श्रीमती ज्योति मुरुम पहले पारंपरिक पद्धति से एकल फसल पर आधारित खेती करती थीं, जिससे उत्पादन सीमित था और आय केवल एक ही स्रोत पर निर्भर थी। आर्थिक संसाधनों की कमी, आधुनिक तकनीकों की जानकारी का अभाव तथा बाजार से जुड़ाव न होने के कारण उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
कृषि विज्ञान केंद्र, बलरामपुर के संपर्क में आने के बाद ज्योति केंद्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं जागरूकता शिविरों में भाग लिया और एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाया। केंद्र के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में उन्होंने फसल उत्पादन के साथ-साथ सब्जी एवं फल उत्पादन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, सूकर पालन तथा गौ-पालन जैसे विभिन्न कृषि आधारित उद्यमों को जोड़ा।


कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा उन्हें उन्नत कृषि तकनीक, संतुलित पोषण प्रबंधन, जल संरक्षण तकनीक एवं प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग की जानकारी दी गई। उन्होंने खेत के संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए जैविक अपशिष्टों को खाद निर्माण एवं पशुपालन में उपयोग करना शुरू किया, जिससे उत्पादन लागत में कमी आई और भूमि की उर्वरता में सुधार हुआ। पहले जहां उनकी वार्षिक आय लगभग 80 हजार रुपये थी, अब बढ़कर लगभग 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने समय-समय पर खेत भ्रमण कर उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया तथा नवीन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं भ्रमण ने से श्रीमती ज्योति मुरुम आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त होकर अन्य महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। वे स्वयं सहायता समूह में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अन्य महिलाओं को भी एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।

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