November 6, 2026 |

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जर्जर स्कूल के टपकते छत के नीचे छात्र पढ़ने को मजबूर,,,कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा…

राजपुर/शंकरगढ़। बलरामपुर जिले में एक ऐसा स्कूल है जो अपनी जर्जर स्थिति पर आँशु बहा रहा है। इस स्कूल से न जाने कितनो को अधिकारी कर्मचारी नेता बनाने में अहम भूमिका निभाई होगी परंतु आज अपने ही अस्तित्व बचाने अधिकारियों व नेताओं का मुह ताक रही है।

        हम बात कर रहे हैं बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकास खंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बचवार की।1980 के दशक में शुरू हुई यह स्कूल जहां खपरैल नुमा विद्यालय हुआ करती थी उसी समय पहली बार बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ बचवार में पक्की छत वाली विद्यालय का निर्माण सन 1983 में किया गया जो एक लम्बे समय से अपने छत के निचे ना जाने कितने छात्रों को शिक्षा दिलावाई और कईयों ने यहां पढ़ कर बड़े बड़े पदों पर स्थापित हुए साथ ही इसी विद्यालय में कई शिक्षकों ने भी अपनी सेवाएं दी।

          आज इसी विद्यालय में शिक्षक के पद पर रहे डॉ.डी.एन.मिश्रा जिले में जिला शिक्षा अधिकारी के सर्वोच्च पद विद्यमान हैं। 43 साल बाद भी यह विद्यालय अपने छत के निचे एक ममता मयी मां के समान अपने आंचल नुमा छत के निचे बच्चों को शिक्षा दिला रही है। पर आज यह विद्यालय अपने जर्जर स्थिति पर आँशु बहा रहा है।इस विद्यालय की छतें और दिवार इतने कमजोर हो गई है कि यह कभी भी अपने अस्तित्व को खो सकती है।

        बरसात के समय इस विद्यालय की छतों पर जगह जगह से पानी टपक रहा है इस विद्यालय का कोई भी ऐसा कमरा नही बचा है जहां की छत से पानी ना टपक रहा हो,इस विद्यालय की दिवारें,खिड़कियां,दरवाजे सभी सभी इतनी जर्जर हो चुकी है कि यह भवन कभी भी गिर सकती है।इस भवन के सुधार या नए भवन की स्विकृती के लिए न तो किसी जनप्रतिनिधि और न ही किसी अधिकारियों द्वारा पहल की है जो बेहद निराशाजनक बात है।इस ओर सरकार और सरकार के बड़े अधिकारीयों की उदासीनता किसी बड़े हादसे को दावत दे रही है।

      शंकरगढ़ बचवार स्थित शासकीय बालक उच्तर माध्यमिक विद्यालय का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि इसकी सभी कक्षाओं में पानी टपक रहा है,इसकी दिवारों में दरारें आ गई है,खतरे के शाए में शिक्षक और विद्यार्थी इस विद्यालय में अध्ययन अध्यापन का कार्य करने को मजबूर हैं।इस विद्यालय में अध्ययन कर रहे छात्रों पर कई बार तो छत के प्लास्टर पर भी गिर चुका है जिससे छात्र घायल भी हो चुके हैं।यह विद्यालय इतनी जर्जर हो चुकी है कि यह कभी भी गिर सकती है।

       मौजूदा शिक्षकों ने बताया कि इस भवन के जीर्णोद्धार के लिए पूर्व और वर्तमान के जनप्रतिनिधियों से कई बार निवेदन किया गया, लेकिन आज तक इस भवन की ओर किसी ने ध्यान नही दिया जो बेहद निराशाजनक बात है।इस क्षेत्र के कांग्रेस सत्ता में विधायक रहे चिंतामणि महराज जो भाजपा सरकार में सरगुजा सांसद हैं वे जब विधायक थे तब इसी भवन में उनहोने बच्चों के साथ खाना खया था तब उन्होंने इस भवन के लिए जीर्णोद्धार का प्रयास किया लेकिन सही कार्य नही होने से आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।भाजपा की सरकार हमेशा से विकसित भारत और विकसित प्रदेश की स्लोगन पर कार्य करती है पर यह स्लोगन यहां पर पुरी तरह से नीर्रथक साबित होता नजर आ रहा है।

     छत्तीसगढ़ में इस तरह के ना जाने कितने स्कूल भवन जर्जर पड़े हुए हैं जहां शिक्षक और छात्र भय के शाए में अध्ययन कार्य कर रहे हैं उसका कोई हिसाब नही है।सरकार तो जनता से लाख दावे करती है लेकिन जब इस प्रकार की तस्वीरें सामने आती है तो ही सरकार की खोखली दावों का पोल खोल कर रख देती है।जब हमने इस जर्जर भवन के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी से बात की तो उन्होंने जिला कलेक्टर से चर्चा कर भवन के संधारण की बात कही है।अब देखने वाली बात होगी कि खबर दिखाये जाने के बाद इस भवन के लिए सरकार क्या पहल करती है जो भविष्य के गर्भ में छिपा है।

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