
राजपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत जनपद पंचायत राजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बदौली में पण्डरी नाला स्थित श्मशान घाट के पास चेक डेम निर्माण कार्य ग्रामीणों के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनता जा रहा है। जल संरक्षण के साथ-साथ यह परियोजना रोजगार सृजन और खेती-किसानी में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रही है।

जानकारी के अनुसार, इस कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति 19.00385 लाख रुपये की लागत निर्माण कार्य 25 फरवरी 2026 से प्रारंभ किया गया। इस परियोजना में कुल 1169 मानव दिवस का प्रावधान रखा गया है, जिसमें श्रमिकों को प्रति दिवस 261 रुपये की दर से मजदूरी दी जा रही है। निर्माण कार्य की एजेंसी ग्राम पंचायत बदौली है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिला है।
चेक डेम के निर्माण से क्षेत्र के लगभग 50 से 60 किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। किसान अब मक्का, सरसों, धान, अरहर, उड़द जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ परवल, भिंडी, बरबटी, मटर, लौकी, तरबूज और बैंगन जैसी सब्जियों की खेती भी कर पा रहे हैं। इससे न केवल खेती का दायरा बढ़ा है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है।

लाभान्वित किसानों में ईश्वर, करीमन, चलराम, बृजलाल, कपील, शिवचंद, चन्नु, उदय, सोमार, चन्द्रपाल और सुखसागर सहित कई अन्य किसान शामिल हैं, जो अलग-अलग रकबे में विविध फसलों की खेती कर रहे हैं। चेक डेम बनने से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जिससे किसानों को अब मौसम पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा।
ग्राम पंचायत बदौली के सरपंच सुरेश राम आंडिल्य ने बताया कि पहले ग्रामीणों को पानी रोकने के लिए बालू और मिट्टी से अस्थायी बांध बनाना पड़ता था, जिससे पर्याप्त पानी नहीं रुक पाता था और खेती प्रभावित होती थी। अब चेक डेम बनने से गांव में 50 से 60 किसानों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और जीवन स्तर में सुधार आ रहा है।

ग्राम पंचायत सचिव नरेंद्र जायसवाल ने बताया कि ग्रामीणों की मांग पर इस चेक डेम का निर्माण कराया गया है। पहले सीमित संसाधनों के कारण किसान पूरी क्षमता से खेती नहीं कर पाते थे, लेकिन अब जल उपलब्धता बढ़ने से वे साल भर विभिन्न प्रकार की फसलें ले पा रहे हैं। बदौली का यह चेक डेम जल संरक्षण, रोजगार और कृषि विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रहा है, जो ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



