September 16, 2026 |

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छत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेश

सरगुजा:-इंदिरा गाँधी क़ृषि विश्वविद्यालया क़ृषि विज्ञानं केंद्र, मैनपाट मे नेशनल बी कीपिंग एंड हनी मिशन अंतर्गत सात दिवसीय मधुमक्खी पालन विषय पर प्रशिक्षण सह भ्रमण का  शुभारंभ राजमोहनी देवी क़ृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार सिन्हा मुख्य अतिथि व AICRP मधुमक्खी के योजना समन्वयक डॉ. प्रदीप भगत विशिष्ट अतिथि व कृषि विभाग सीतापुर के अनुविभागीय कृषि अधिकारी अनीता इक्का के उपस्थिति में शुभारंभ हुआ है।

क़ृषि विज्ञानं केंद्र मैनपाट के संस्था प्रमुख डॉ.राजेश चौकसे ने स्वागत उदबोधन मे बताया की  फसलों की पोलिनेशन में मधुमक्खी का बहुत बड़ा योगदान है क्षेत्र में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाएं हैं इसी को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र के इच्छुक 25 कृषक जो प्रशिक्षण के लिए चयन किया गया है,मधुमक्खी पालन लाभदायक है मधुमक्खियां पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जैव विविधता बढ़ती है,कृषि कॉलेज अधिष्ठाता डॉक्टर संतोष कुमार सिंह ने मधुमक्खी पालन के लिए उपयोगी फसल व उपयोगी फूल  है उसके बारे में विस्तार से बताएं साथी ही अधिक उत्पादन देने वाले इटालियन मधुमक्खी पालन के बारे में विस्तार से बताया है।

वहीं मधुमक्खी पालन से फसल उत्पादन में भी 10 से 15  प्रतिशत तक उपज में वृद्धि होती है,मधुमक्खी पालन केवल एक व्यवसाय नहीं बल्कि प्रकृति और कृषि के बीच एक अद्भुत समाजस्या का प्रतीक है,आलू अनुसंधान केंद्र प्रमुख डॉक्टर प्रदीप भगत ने मधुमक्खी पकड़ने व मधुमक्खी बॉक्स में रखना के तकनीक के बारे में विस्तार से बताया,मधुमक्खी पालन कर किसान अपने आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

वहीं इस विषय पर कृषकों को मधुमक्खी पालन के प्रति प्रेरित किया गया,उन्होंने कहा कि नेशनल हनी मिशन के तहत अधिक से अधिक कृषकों को इस व्यवसाय में जोड़ें और किसानों को फायदा दिलाए,कीट वैज्ञानिक डॉक्टर सचिन जायसवाल ने मधुमक्खी के जीवन चक्र व मधुमक्खी का स्वभाव के बारे में बताया,कृषक समन्वित कृषि प्रणाली मे मधुमक्खी पालन कर आय प्राप्त कर सकते हैं साथ ही सब्जी और उद्यान की फसलों में मधुमक्खी से परागन होने के फायदे के बारे में विस्तार से बताया है,वहीं कीट वैज्ञानिक वीरेंद्र चौहान ने मधुमक्खी पालन में मधु बॉक्स के  रखरखाव व उपचार के बारे में बताया,कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर शमशेर आलम द्वारा किया गया कार्यक्रम मे प्रदीप कुमार लकड़ा एवं केंद्र के समस्त कर्मचारी व कृषक उपस्थित रहे।

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