November 1, 2026 |

BREAKING NEWS

कोरिया में संभागीय आबकारी उड़नदस्ते की बड़ी कार्रवाई,56 लीटर अवैध महुआ व हड़िया शराब जब्तराजपुर के अग्रसेन भवन में विधानसभा स्तरीय प्रबुद्धजन सम्मेलन संपन्न,वरिष्ठजनों का हुआ सम्मान2 नवंबर को सजेगा राज्योत्सव का भव्य मंच,’सशक्त नारी, युवा उड़ान’ थीम पर जुटेंगे ख्याति प्राप्त और स्थानीय कलाकारचेकडैम निर्माण में गुणवत्ता से समझौता पड़ा भारी,तकनीकी सहायक की संविदा समाप्तउल्लास कार्यक्रम के तहत दीपावली की पूर्व संध्या पर जिलेभर में जलेगा ‘एक दीप साक्षरता का’कलेक्टर ने किया राज्योत्सव स्थल का निरीक्षण, मौसम को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएँ समय पूर्व सुनिश्चित करने के निर्देश‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर विचार रखेंगे बलरामपुर के युवा,3 नवंबर को जिला स्तरीय युवा संसदसूरजपुर में आबकारी उड़नदस्ते की बड़ी कार्रवाई,22 लीटर अवैध महुआ व मध्य प्रदेश की विदेशी शराब जब्तबलरामपुर जिले में भारी बारिश की आशंका, 29 अक्टूबर को सभी स्कूलों में छुट्टी घोषितपूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय लरंग साय की प्रतिमा का वर्चुअल अनावरण,मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी 202 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात
आस्थाकोरियाचिकित्साछत्तीसगढ़जशपुरटेक्नोलॉजीपत्थलगांवबलरामपुरमनोरंजनराजनीतिलाइफस्टाइलसरगुजासीतापुरसुरजपुर

सड़क न होने से मरीज को झलगी में टांगकर दो किमी पैदल चले ग्रामीण,खुली स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था की पोल

बलरामपुर/कुसमी। सरकार गांव-गांव बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सड़क कनेक्टिविटी पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन बलरामपुर जिले के कुसमी जनपद पंचायत क्षेत्र के भईसापाठ से सामने आई एक तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।

यहां एक मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को झलगी का सहारा लेकर करीब 2 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।

बताया जा रहा है कि 50 वर्षीय रदनी की सोमवार की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई।परिजनों ने उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी की, लेकिन बस्ती तक पहुंचने के लिए पक्की और  सुगम सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस सहित कोई भी वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका।मजबूर होकर ग्रामीणों ने झेलगी का सहारा लिया और दो लोगों ने बुजुर्ग महिला को कंधे पर टांगकर लगभग दो किलोमीटर का सफर तय किया।

ग्रामीण क्षेत्रों में किसी व्यक्ति के अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ने पर सबसे पहली जरूरत समय पर चिकित्सा सुविधा और अस्पताल तक पहुंचने की होती है। लेकिन अगर सड़क की स्थिति ऐसी हो कि एंबुलेंस पहुंचना मुश्किल हो और मरीज को ग्रामीणों के कंधों के सहारे ले जाना पड़े, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ जरूरतमंद ग्रामीणों तक किस तरह पहुंच रहा है।

भईसापाठ की यह तस्वीर महज एक मरीज को झलगी में ले जाने की तस्वीर नहीं, बल्कि दुर्गम ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था और सड़क सुविधा की जमीनी स्थिति का आईना नजर आ रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं का सीधा संबंध लोगों की जिंदगी से है। गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचने में हुई देरी मरीज के लिए भारी पड़ सकती है। ऐसे में केवल योजनाओं और सुविधाओं के दावों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बेहतर कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से ही ग्रामीणों को वास्तविक राहत मिल सकती है।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और स्थानीय नेता भईसापाठ की इस तस्वीर को कितनी गंभीरता से लेते हैं और ग्रामीणों की इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।

Related Articles

Check Also
Close
error: Content is protected !!