
बलरामपुर। गंभीर रूप से घायल अथवा पीड़ित व्यक्ति के मृत्युकालीन कथन (Dying Declaration) दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर बलरामपुर पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने जिले के अधिकारियों को कड़े व स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कलेक्ट्रेट कक्ष से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एसपी ने जिले के कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों, पुलिस अधिकारियों एवं चिकित्सा अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली और मृत्युकालीन कथन दर्ज करने संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की विस्तार से जानकारी दी। यह बैठक माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा रमेश चक्रधारी विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन प्रकरण में पारित आदेश तथा शासन के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित की गई थी।
उपचार पहली प्राथमिकता, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग जरूरी
बैठक को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक ने कहा कि किसी भी गंभीर रूप से घायल या पीड़ित व्यक्ति के मामले में सबसे पहली प्राथमिकता उसके त्वरित और समुचित उपचार की होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मृत्युकालीन कथन न्यायालय में एक अत्यंत ठोस और निर्णायक साक्ष्य होता है, जिससे अपराधी को सजा दिलाने में मदद मिलती है। साक्ष्य की निष्पक्षता और विश्वसनीयता अदालत में सिद्ध हो सके, इसके लिए कथन दर्ज करते समय यथासंभव ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह पूरी प्रक्रिया भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 26(ए) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित होगी।
एसओपी के प्रमुख दिशा-निर्देश:
- मजिस्ट्रेट को त्वरित सूचना: सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी या डॉक्टर तत्काल क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट को सूचित करेंगे। हालांकि, पीड़ित की स्थिति अत्यधिक नाजुक होने पर चिकित्सक या पुलिस अधिकारी स्वयं भी बयान दर्ज कर सकते हैं।
- मानसिक स्थिति का मेडिकल प्रमाण: बयान दर्ज करने से पहले और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ड्यूटी डॉक्टर से पीड़ित की मानसिक व शारीरिक स्थिति (सचेत रहने) का लिखित प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य होगा।
- दबावमुक्त वातावरण: किसी भी बाहरी दबाव या बहकावे की संभावना को खत्म करने के लिए बयान दर्ज करते समय परिजनों, परिचितों और पुलिसकर्मियों को कक्ष से बाहर रखा जाएगा।
- सटीक भाषा और इशारों का अंकन: बयान प्रश्न-उत्तर शैली में पीड़ित के मूल शब्दों और उसकी स्थानीय बोली में ही लिखा जाएगा। यदि पीड़ित बोलने में असमर्थ है, तो उसके इशारों को भी स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा।
- सत्यापन और हस्ताक्षर: कथन पूरा होने के बाद उसे पीड़ित को पढ़कर सुनाया जाएगा और उसके हस्ताक्षर अथवा अंगूठे का निशान लिया जाएगा। इसके साथ ही दर्जकर्ता अधिकारी व डॉक्टर भी तारीख और समय के साथ अपने हस्ताक्षर करेंगे।
पुलिस अधीक्षक ने उपस्थित सभी अधिकारियों को इन दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करने के सख्त निर्देश दिए, ताकि पीड़ित को समय पर बेहतर इलाज मिलने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया में भी पूरा न्याय मिल सके।


