
राजपुर। छत्तीसगढ़ सरकार धान खरीदी का दो दिनों का समय अवधि बढ़ाया था जिसके बाद बलरामपुर जिले के राजपुर धान समिति केंद्र में एक बड़ा फर्जीवाड़ा देखने को मिला है।
6 फरवरी को लगभग 11 किसानों का धान टोकन कटा हुआ था जिसमें पांच किसान धान बिक्री हेतु समिति में लाए हुए थे। सुबह 10:00 बजे से ही चार किसान समिति केंद्र में धान बिक्री का इंतजार करते रहे परंतु समिति के प्रबंधक और उनके सहयोगियों द्वारा उनका धान लेने से मना कर दिया। जानकारी लगने पर जब मीडिया की टीम वहाँ पहुँची तब किसानों का धान खरीदी का कार्य प्रारंभ किया गया।
इस दौरान पता चला कि ग्राम पंचायत नरसिंहपुर निवासी रामधनी यादव जिसका 70 कुंटल धान खरीदी करने का बात सामने आया लेकिन जांच में पता चला कि उसका धान समिति केंद्र में आया ही नहीं और उसकी खरीदी समिति प्रबंधक के द्वारा कर दिया गया। इस संबंध में जब मीडिया नई टीम ने राजपुर तहसीलदार और नायब तहसीलदार को सूचना दिया तो मौके में पहुंचकर अधिकारियों ने इस विषय पर पड़ताल किया जहां साफ तौर पर पता चला कि इस किसान के द्वारा एक भी धान नही लाया गया और समिति प्रबंधक के मिलीभगत से उसका 70 क्विंटल धान खरीदी कर लिया गया। जिसके बाद अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पंचनामा तैयार कर उस खरीदी को निरस्त कराया गया।
पटवारी की कार्यशैली भी संदिग्ध :– सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार धान का रकबा चढ़ाने पटवारियों की बड़ी भूमिका होती है।पटवारी मौके का मुआयना कर कितने रकबे में फसल लगा है सत्यापन का कार्य करते हैं।परंतु यहाँ पटवारियों ने भी बड़ा खेल किया है।जिस किसान का धान खरीदी केंद्र में खरीदी की गई थी उसके अधिकांशतः जमीन में शब्जी की खेती की गई है।
इस मामले में राजपुर तहसीलदार कावेरी मुखर्जी व नायब तहसीलदार नरेंद्र कँवर ने बताया कि इस प्रकार के फर्जीवाड़ा के बाद जो भी दोषी जांच के दौरान पाए जाते हैं उन पर शक्ति से कार्रवाई की जाएगी।



