November 4, 2026 |

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जमीनी हकीकत से दूर सुशासन शिविर में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग,,,विभागीय योजना केवल कागजों में ही…

हैंडपंपों की वस्तु स्थिति की जानकारी विभाग के पास नहीं

राजपुर। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) द्वारा नल जल योजना के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है। क्षेत्र के कई गांवों में योजना के तहत पाइपलाइन विस्तार, पानी टंकी निर्माण और स्टैंड पोस्ट तो बना दिए गए, लेकिन नियमित संचालन और रखरखाव के अभाव में अधिकांश योजनाएं केवल शोपीस बनकर रह गई हैं।

ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि विभागीय कर्मचारी निर्माण कार्य पूरा होने के बाद गांवों की ओर दोबारा झांकने तक नहीं आते। इसके कारण कई स्थानों पर हैंडपंप खराब पड़े हैं और उनकी मरम्मत कार्य लंबे समय से बंद है। ग्रामीणों को मजबूरी में दूर-दराज के स्रोतों से पेयजल लाना पड़ रहा है।

पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी जमीनी हकीकत से दूर केवल शासन द्वारा आयोजित “संवाद से समाधान तक” सुशासन शिविर में ही सक्रिय दिखाई देते हैं, जबकि गांवों में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग गांव-गांव जाकर बंद पड़ी नल जल योजनाओं और खराब हैंडपंपों की तत्काल जांच कर मरम्मत कार्य शुरू कराए, ताकि लोगों को गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से राहत मिल सके।

       वहीं सुशासन शिविर में विभागीय जानकारी देते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की उप अभियंता मंजू खलखो ने बताया कि राजपुर जनपद क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में कुल 1996 हैंडपंप स्थापित हैं। हालांकि जब इन हैंडपंपों की वर्तमान स्थिति, बंद पड़े हैंडपंपों की संख्या और मरम्मत कार्य के संबंध में जानकारी मांगी गई तो उप अभियंता जवाब देने में असहज नजर आईं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग के पास ही हैंडपंपों की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था का प्रभावी संचालन कैसे संभव हो पाएगा।

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