
बलरामपुर। ‘सेवा मेरा योगदान’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए सेवा संकल्प अभियान के तहत जिला प्रशासन और वन विभाग ने पर्यावरण व जल संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की। अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों ने घाघवा नाला तथा सेंदुर नदी तट पर सामूहिक श्रमदान कर जल संरक्षण, स्वच्छता और हरियाली का संदेश दिया।
घाघवा नाले पर 200 बोरियों से बना बंधान
श्रमदान की शुरुआत घाघवा नाले में बोरी बंधान के निर्माण के साथ हुई। कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर और वनमंडलाधिकारी आलोक वाजपेयी ने स्वयं मिट्टी की बोरियां उठाकर श्रमदान में हिस्सा लिया। लगभग 150 से 200 बोरियों से तैयार किए गए इस बंधान से वर्षा जल का संचयन होगा, जिससे क्षेत्र में भू-जल स्तर में सुधार होगा।

नदी तट की सफाई और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पौधारोपण
नाले पर बंधान बनाने के बाद संयुक्त दल सेंदुर नदी तट पहुँचा, जहाँ ‘स्वच्छता ही सेवा’ के तहत तटवर्ती क्षेत्र में सघन सफाई अभियान चलाया गया। इसके साथ ही हरित क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया गया।
जनपद अध्यक्ष सुश्री सुमित्रा चेरवा, जिला पंचायत सीईओ आशुतोष चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने पौधे रोपे और उनके बड़े होने तक नियमित देखरेख का संकल्प लिया।

अधिकारियों ने दिया जल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि ‘जल है तो कल है’। वर्षा जल को सहेजने में ऐसे छोटे बंधान बेहद असरदार सिद्ध होते हैं। प्रत्येक नागरिक को अपने नजदीकी जलस्रोतों के संरक्षण का जिम्मा उठाना चाहिए।
पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने कहा कि सेवा का भाव समाज को जोड़ता है। जब प्रशासन और आम नागरिक एक साथ श्रमदान करते हैं, तो ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव स्पष्ट नजर आता है।
डीएफओ आलोक वाजपेयी ने कहा कि जलस्रोतों का संरक्षण और वृक्षारोपण ही पर्यावरण की रीढ़ हैं। उन्होंने नागरिकों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़कर पौधरोपण व उनके संरक्षण की अपील की।
इस अभियान ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पर्यावरण और जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रहकर सामूहिक जनभागीदारी से ही सफल हो सकता है।



