राजपुर। भाजपा सरकार द्वारा गुरुवार को प्रदेश के सभी निकायों के एल्डरमैन की घोषणा कि है। दो साल बाद हुए इस एल्डरमैन की घोषणा में एक ऐसा मामला सामने आया है जो लोगो के बीच चर्चा का विषय बन गया है। ऐसा इसलिए है कि राजपुर नगर पंचायत में हुए तीन एल्डरमैन के नामो की घोषणा में दो एल्डरमैन ऐसा बनाया है जिसमें एक पंचायत में निर्वाचित जनप्रतिधि है और दूसरा छत्तीसगढ़ शासन के गौ सेवा आयोग, पशुधन विभाग की विकासखंड स्तरीय समिति के अध्यक्ष नियुक्त हैं। इस मामले को लेकर नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 09 के पार्षद ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

नगरीय निकायों के चुनाव के दो वर्ष बीत जाने के बाद आखिरकार छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नगरीय निकायों में नामांकित पार्षदों (एल्डरमैन) की नियुक्ति की आधिकारिक सूची जारी कर दी गई है। इस सूची के अनुसार, बलरामपुर जिले के अंतर्गत आने वाली नगर पंचायत राजपुर में तीन नए एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं। जिसमें पंकज गुप्ता मनोज बंसल एवँ अनिल तिवारी का नाम शामिल है।

एल्डरमैन की सूची जारी होने के बाद राजपुर नगर पंचायत वार्ड क्रमांक 09 के पार्षद प्रभात रंजन त्रिपाठी (राजन त्रिपाठी) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दो साल बाद सरकार द्वारा सभी नागरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति की है।दो साल बाद की गई इस नियुक्ति में एक बहुत ही बेहतरीन कारनामा सरकार का देखने को मिला है जिसमें राजपुर जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोटागहना के उप सरपंच अनिल तिवारी को नगर पंचायत राजपुर का एल्डरमैन नियुक्त किया गया है। तो वहीँ पंकज गुप्ता, जो छत्तीसगढ़ शासन के गौ सेवा आयोग, पशुधन विभाग की विकासखंड स्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं, उन्हें भी एल्डरमैन बनाया गया है। यह एक भाजपा सरकार का अजूबा माना जा सकता है क्योंकि एक व्यक्ति को जो कि पहले से निर्वाचित और छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नियुक्त किया गया है वह मनोनीत कैसे हो सकता है। साथ ही यह भी देखने को मिल रहा है कि नगर पंचायत चुनाव के बाद कई लोगों से वादे किए गए थे की एल्डरमैन बनाया जाएगा और लगभग 17 से 18 लोगो की सूची भी वायरल हुई थी लेकिन सूची आने के बाद लोगों को निराशा ही हाथ लगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री आदिवासी हैं जिससे आदिवासियों के हित की बात होगी और एक आदिवासी वर्ग से एल्डरमैन बनाना है जो कि काफी चर्चा का विषय रहा था। लेकिन सूची में ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला, मुझे लगता है कि यह भी एक बहुत अच्छा छलावा है। सरकार के नाकामी और कारनामे में धीरे-धीरे जनता के सामने उजागर हो रहे हैं अब देखना है कि आगे क्या होता है। उन्होंने नव नियुक्त एल्डरमैनों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जो नहीं बन पाएं है वे धैर्य रखें और समय का इंतजार करें।

आपको बताते चले कि ग्राम पंचायत का कोई भी वर्तमान पंच (या वार्ड सदस्य) एवँ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नियुक्त सदस्य एक ही समय पर नगर पंचायत में ‘एल्डरमैन’ (मनोनीत पार्षद) नहीं बन सकता। इसके पीछे कानूनी और प्रशासनिक कारण भी है।
दोहरे पद का निषेध (Offfice of Profit / Dual Membership)
पंचायती राज और नगरीय निकाय (Municipal) कानूनों के नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक ही समय में दो अलग-अलग स्थानीय निकायों (Local Bodies) का सदस्य नहीं हो सकता। ग्राम पंचायत ‘ग्रामीण निकाय’ का हिस्सा है, जबकि नगर पंचायत ‘शहरी निकाय’ का हिस्सा है।
‘लाभ का पद’ या अयोग्यता
यदि ग्राम पंचायत का कोई पंच नगर पंचायत में एल्डरमैन के रूप में मनोनीत होना चाहता है, तो उसे नियमों के तहत अयोग्य माना जाएगा। कानूनन, एक जनप्रतिनिधि एक साथ दो क्षेत्रों या दो अलग-अलग स्तरों की स्वायत्त संस्थाओं में पद नहीं संभाल सकता।
विकल्प क्या है?
यदि ग्राम पंचायत का कोई पंच नगर पंचायत में एल्डरमैन बनने की योग्यता रखता है (जैसे कि उसे नगरीय प्रशासन का विशेष अनुभव हो और वह राजनीतिक दल या सरकार की पसंद हो) और वह एल्डरमैन बनना चाहता है, तो उसे सबसे पहले ग्राम पंचायत के पंच पद से अपना त्यागपत्र (Resignation) देना होगा। पंच का पद छोड़ने और इस्तीफा स्वीकार होने के बाद ही राज्य सरकार या राज्यपाल/प्राधिकृत अधिकारी द्वारा उसे नगर पंचायत में एल्डरमैन के रूप में मनोनीत किया जा सकता है। एक समय पर एक ही पद रहेगा। अगर एल्डरमैन बनना है, तो पंच का पद छोड़ना अनिवार्य है।



