
राजपुर। नगरीय चुनाव संपन्न होने के बाद अब लोगो की निगाहें चुनाव परिणाम पर टिकी हुई है।लोग जगह जगह वार्ड पार्षदों सहित अध्यक्ष के हार जीत की समीक्षा करते दिखाई दे रहे हैं।15 फरवरी को नगरीय निकाय चुनाव के परिणाम आने हैं अब देखना यह होगा कि इस चुनाव में किसे फतह मिलती हैं और किसे शिकस्त।
नगरीय निकाय चुनाव 11 फरवरी को सम्पन्न हो गई है।नगर पंचायत के अंतर्गत आने वाले वार्ड पार्षदों सहित अध्यक्ष की किस्मत ईवीएम पेटी में बंद हो गई है।जब से चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई है उसके बाद से ही लोगों में चुनावी हार जीत की समीकरण पर चर्चा काफी तेज हो गई है।बात करें राजपुर नगर पंचायत की तो यहाँ त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला है।भाजपा ने जहाँ दो बार के पार्षद धरम सिंह को मैदान उतारा था तो वहीँ कांग्रेस ने पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती खोरेन खलखो पर अपना दाँव आजमाया है।वहीँ भाजपा से ताल्लुकात रखने वाले गोवर्धन पैकरा भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में दिखाई दिए।
यदि बात करें भाजपा से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार धरम सिंह की तो नगर पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार धर्म सिंह वार्ड क्रमांक 01 से दो बार के पार्षद रह चुके एवं विगत 15 माह से नगर पंचायत के अध्यक्षीय पद सम्हाल रहे थे।धरम सिंह अपने सरल स्वभाव और मिलनसार के रूप में जाने जाते हैं,और अपने क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते हैं।वे अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान नागरीय क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों को अंजाम दिया है।धरम सिंह गोंड समाज से ताल्लुकात रखते हैं और वे माता राजमोहनी देवी के प्रचारक भी हैं।बात करें राजपुर नगर पंचायत की तो यहाँ गोंड़, कँवर एवं क्रिस्चियन समाज के लोग बहुतायत में हैं।भाजपा इस चुनाव में अपनी घोषणा पत्र भी जारी किया है जिसमें कई ऐसे बिंदु है जो नगर के विकास में एक मिल का पत्थर साबित हो सकता है।भाजपा की घोषणा पत्र एवं राज्य में भाजपा की सरकार कहीं न कहीं मतदातायें भी इस बात से काफी प्रभावित हुए हैं।
बात करें कांग्रेस के उम्मीदवार श्रीमती खोरेन खलखो की तो खोरेन खलखो नगर पंचायत राजपुर में वार्ड क्रमांक 15 में अच्छी खासी पकड़ रखती है। वे अपने वार्ड से दो बार पार्षद रह चुकी है वहीँ इस वार्ड से उनके पुत्र भी पार्षद रह चुके हैं।खोरेन खलखो दो बार इस नगर पंचायत में अध्यक्षीय पद सम्हाल चुकी है।पहले राजपुर ग्राम पंचायत था जिसमें खोरेन खलखो सरपंच थी परंतु 2003 में जोगी शासन काल मे जैसे ही राजपुर को ग्राम पंचायत से नगर पंचायत का दर्जा मिला खोरेन खलखो सरपंच से नगर पंचायत अध्यक्ष के रूप में अपना कार्यभार संभाला। जिसके बाद नगर पंचायत के चुनाव में वे अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी।अपने मुखर व्यक्तित्व और नगरीय क्षेत्रों में मतदाताओं के रसोईघर तक पहुंच रखने वाली खोरेन खलखो किसी पहचान की मोहताज नहीं है।लोग खोरेन खलखो को इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि वे अपने कार्यकाल के दौरान बड़ी ही ईमानदारी और मुखर होकर लोगों के लिए लड़ाई लड़ी है।हालाँकि दूसरे कार्यकाल के दौरान पार्षदों ने उन्हें अविश्वास प्रस्ताव पारित कर अध्यक्ष पद से गिरा दिया था।क्रिस्चियन समाज से ताल्लुकात रखने वाली श्रीमती खोरेन खलखो कांग्रेस से अध्यक्ष पद हेतु सबसे मजबूत दावेदार मानी जाती है।
नगर पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद के निर्दलीय प्रत्याशी गोवर्धन पैकरा भाजपा से टिकट नही मिलने के कारण निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए मैदान में डटे हुए थे।कँवर समाज से ताल्लुकात रखने वाले गोर्वधन पैकरा के पिता रामा शंकर पैकरा पार्षद पद का दायित्व निभा चुके हैं।कँवर समाज मे अपनी अच्छी पैठ रखने वाले रामा शंकर पैकरा अपने पुत्र गोवर्धन पैकरा को इसका कितना लाभ दिला पाए यह तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चल सकेगा।
बहरहाल जो भी हो भाजपा जहाँ पुरे संगठन व दमखम के साथ मैदान में थे वहीँ इस चुनाव में कांग्रेस खेमे में इस बात की कमी देखी गई।वहीँ इस त्रिकोणीय मुकाबला में निर्दलीय प्रत्याशी भी भाजपा से टिकट नही मिलने के कारण नाराज दिखे।निर्दलीय प्रत्याशी को मनाने सरगुजा संसद चिंतामणि महराज उनके घर भी गये थे परंतु बात नही बन सकी अब देखने वाली बात यह होगी कि निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा को इस चुनाव में कितना नुकसान पहुंचा पाता है।नगर पंचायत राजपुर में देखा जाए तो प्रयत्क्ष चुनाव में दो बार कांग्रेस के अध्यक्ष एवं एक बार भाजपा से अध्यक्ष चुना गया था।वहीँ पिछले बार कांग्रेस शासन में अप्रत्यक्ष रूप से नगर अध्यक्ष का चुनाव कराया गया था जहाँ भाजपा ने बाजी मारी थी।इस बार प्रत्यक्ष रूप से नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव कराया गया है। खैर 15 फरवरी को मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि किसके सर नगर अध्यक्ष का शेहरा सजता है।



