
राजपुर। राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा समिति राजपुर के तत्वावधान में खुटहनपारा स्थित सरना स्थल पर विशाल कर्मा पूजा एवं कर्मा पर्व पूरी आस्था, परंपरा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस भव्य आयोजन में आदिवासी समाज के हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
सुबह 10 बजे सरना स्थल पर स्थित करम वृक्ष के समक्ष धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुआ। पाहन/पुजारी मटरू राम लकड़ा एवं रामसाय लकड़ा द्वारा विधि-विधान से करम देव की पूजा-अर्चना कराई गई। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को कर्मा पर्व की ऐतिहासिक परंपरा, प्रकृति संरक्षण और इसके सामाजिक महत्व से जुड़ी कथा-कहानियां सुनाई गईं। पूजा संपन्न होने के बाद पारंपरिक कर्मा नृत्य का दौर शुरू हुआ, जिसमें माताओं और बहनों ने पारंपरिक वेशभूषा में करम वृक्ष के चारों ओर मांदर और झांझ की थाप पर सामूहिक नृत्य कर समां बांध दिया।

संस्कृति और सामाजिक एकता का दिया संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कर्मा पर्व प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का अनुपम प्रतीक है। समाज के प्रबुद्धजनों ने नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली आदिवासी संस्कृति, रीति-रिवाजों और प्राकृतिक धरोहर से जोड़े रखने का आह्वान किया। देर शाम तक चले इस उत्सव में पूरा क्षेत्र पारंपरिक लोकगीतों और उल्लास से सराबोर रहा।
समारोह में सामरी विधायक श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इसके अलावा सामरी के पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम, जनपद पंचायत अध्यक्ष विनय भगत, नगर पंचायत कुसमी के अध्यक्ष राजेंद्र भगत, लघु वनोपज जिला अध्यक्ष लालसाय मिंज, फुलसाय कुजूर, छोटे लाल, उमाशंकर भगत, सूरज तिर्की, उमिल कुजूर, बबलू उरांव, कृष्णा उरांव, जयमल उरांव, वीरेंद्र लकड़ा, श्रीमती धनमती कंवर, श्रीमती सविता कुजूर, श्रीमती सुकुरमूनी कुजूर, श्रीमती साधना उरांव, श्रीमती प्रतिमा कुजूर और श्रीमती बिफनी तिर्की सहित समाज के प्रमुख पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।



