June 21, 2026 |

BREAKING NEWS

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कृषि मंडी प्रांगण में हुआ सामुहिक योगाभ्यास,,,योग प्रशिक्षकों ने कराया विभिन्न योगासन…केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर जनकल्याण शिविर आयोजित,योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता – सामरी विधायक5 प्रतिशत मॉडल निर्माण में विधायक ने किया श्रमदान,मोर गांव-मोर पानी अभियान के तहत जल शक्ति जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजितअग्निवीर सेना में चयनित अभ्यर्थियों से कलेक्टर ने की सौजन्य मुलाकात,प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित.पुर्व पार्षद ने बीएमओ को सौंपा ज्ञापन,खराब पड़े फूली ऑटोमेटिक एनालाइजर ब्लड टेस्ट मशीन चालू करने की माँगसंभागीय आबकारी उड़नदस्ता के ऑपरेशन क्लीन को फिर मिली बड़ी सफलता,दो और नशे के सौदागर 80 नग नशीले इंजेक्शन के साथ गिरफ्तारराष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से संवर रहा बचपन,चिन्हांकित 24 बच्चों में से 11 बच्चों का हुआ सफलतापूर्वक उपचारमुख्यमंत्री बाल संदर्भ एवं चिरायु योजना से संभव हुआ निःशुल्क उपचार,सफल कॉक्लियर इम्प्लांट के बाद अब देविक सुन रहा अपनों की आवाज़सेवा सेतु पोर्टल से आसानी से मिल रहा शासकीय सेवाओं का लाभ,441 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्धअवैध रेत परिवहन पर खनिज विभाग की कार्रवाई,महान नदी क्षेत्र में अवैध उत्खनन पर 3 ट्रैक्टर वाहन जब्त
BalrampurBussinesscrimeEducationjashpurlifestylepatthalganvpolitics

ग्राम करजी में फर्जी पट्टा का मुद्दा गरमाया,,,ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जाँच की माँग…

राजपुर। बलरामपुर जिले के राजपुर में सरकारी जमीनों पर फर्जी पट्टों के जरिए कब्जे के आरोपों के बीच ग्राम पंचायत करजी का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां पिछले लगभग दस वर्षों से संचालित आईटीआई कॉलेज एवं छात्रावास की भूमि पर फर्जी रूप से पट्टा प्रस्तुत कर स्वामित्व का दावा किए जाने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

           जानकारी के अनुसार करजी गांव में आईटीआई कॉलेज और छात्रावास कई वर्षों से संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में छात्र अध्ययनरत हैं। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह द्वारा संस्थान का लोकार्पण किया गया था। हाल ही में कॉलेज परिसर में अहाता निर्माण कार्य प्रारंभ होने के दौरान एक व्यक्ति पट्टा होने का दावा किया है और संबंधित भूमि को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए निर्माण कार्य पर आपत्ति दर्ज करा कर स्थगन जारी करा दिया गया है।

       घटना के बाद पूरे गांव में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस व्यक्ति के नाम पर पट्टा जारी किया गया है, उसे गांव के अधिकांश लोग नहीं जानते। उनका कहना है कि सरकारी भूमि के रिकॉर्ड में कथित रूप से हेरफेर कर भूमि को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज किया गया है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि भूमि निजी स्वामित्व की थी, तो पिछले दस वर्षों से वहां शासकीय मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान और छात्रावास का संचालन कैसे होता रहा। साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर जब सरकार खुद उस आईटीआई कॉलेज भवन का लोकार्पण किया था तो सरकार ने कैसे उस निजी स्वामित्व की भूमि पर कॉलेज बनाने की स्वीकृति दी थी।

        ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग दस से बारह वर्ष पूर्व से बने हुए आईटीआई कॉलेज की भूमि को मदन सिंह पिता रामेश्वर सिंह का होना बताया जा रहा है और उसके द्वारा आखिर आवश्यक दस्तावेज क्यों पेश नही किया जा रहा है। बताया जा रहा है उसके रिश्तेदार शासकीय उच्च पद पर बैठे हैं जिससे उनके द्वारा राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर दबाव बना कर उनके पक्ष में निर्णय दिलाने का कार्य किया गया है।यह भी आरोप है कि उक्त भूमि स्वामी के द्वारा एनएच भू अधिग्रहण के दौरान मुवावजे की राशि के लिए सारा खेल खेला गया है और इस लाभ भी ले लिया गया है। बताया जा रहा है कि मदन सिंह पिता रामेश्वर सिंह की और भी भूमि लगभग दस खाते ग्राम पंचायत करजी में दर्ज दिखाई दे रही है जिसमें पहाड़ी कोरवा परिवार भी प्रभावित हो सकते हैं।ग्रामीणों के अनुसार उक्त खाता धारक मूल निवासी उत्तरप्रदेश का बताया जा रहा है जिसका ग्राम पंचायत करजी में कोई निवास नही है फिर भी भूमि लगभग दस खातों में दर्ज है आखिर कैसे।

         ग्रामीणों का आरोप है कि जिले में सरकारी जमीनों से जुड़े मामलों में अनियमितताएं बढ़ती जा रही हैं तथा कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा राजस्व अमले की कथित मिलीभगत से सरकारी भूमि पर दावा करने की कोशिश की जा रही है। शिक्षा संस्थान की भूमि पर स्वामित्व विवाद सामने आने से लोगों में रोष व्याप्त है।

इधर, कॉलेज प्रबंधन ने भी मामले पर चिंता व्यक्त की है। प्रबंधन का कहना है कि भूमि विवाद बढ़ने की स्थिति में कॉलेज और छात्रावास का संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और चक्काजाम जैसे कदम उठाने को बाध्य होंगे।

        अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आईटीआई कॉलेज एवं छात्रावास की भूमि पर पट्टा किन परिस्थितियों में जारी हुआ, इसकी वैधता क्या है और यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

Related Articles

Check Also
Close
error: Content is protected !!