
बलरामपुर। बच्चों के अधिकार एवं संरक्षण को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा 17 सितंबर को बलरामपुर तथा 24 सितंबर को रामचंद्रपुर में विकासखंड स्तरीय बाल संरक्षण समिति का एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में समेकित बाल संरक्षण योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिभागियों को बच्चों के अधिकारों एवं संबंधित कानूनों की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों को बताया गया कि बच्चों का शोषण गंभीर अपराध है। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम 2012 के अंतर्गत अपराध के प्रकार, धारा 3 से 15 तक दंड के प्रावधान, मामले की रिपोर्टिंग तथा बालक के कथन अभिलिखित करने की प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही किशोर न्याय अधिनियम 2015 की जानकारी भी दी गई।
मानव तस्करी रोकने के लिए ग्राम से जिला स्तर तक निगरानी रखने और आवश्यकतानुसार पुलिस सहायता लेने के निर्देश दिए गए। पंचायत, विकासखंड एवं जिला स्तरीय बाल संरक्षण समितियों को आपसी समन्वय से कार्य करने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव तस्करी, अवैध प्रवास और बाल श्रम रोकने में श्रम विभाग का सहयोग लेने के लिए प्रेरित किया गया। ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव एवं कोटवारों के माध्यम से पलायन पंजी संधारित करने के निर्देश दिए गए, जिसमें पलायन करने वाले बच्चों व महिलाओं की पूरी जानकारी मोबाइल नंबर सहित दर्ज करना अनिवार्य होगा।
बाल विवाह को सामाजिक बुराई के साथ कानूनन अपराध बताते हुए परियोजना अधिकारियों के माध्यम से इस पर तत्काल रोक लगाने तथा विशेषकर अक्षय तृतीया पर होने वाले विवाहों की रोकथाम के सख्त निर्देश दिए गए। समझाइश के बाद भी बाल विवाह कराए जाने पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष निर्धारित है। बाल विवाह कराने वाले पुरोहित और बारात में शामिल सगे-संबंधियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले तथा विधि से संघर्षरत बच्चों को पुलिस के सहयोग से बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
कार्यशाला में संबंधित विकासखंडों के अनुविभागीय अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, सहायिकाएँ एवं चाइल्ड लाइन के सदस्य उपस्थित रहे। बच्चों से संबंधित किसी भी समस्या के लिए टोल फ्री नंबर 1098 पर संपर्क किया जा सकता है।

