बलरामपुर चोरी के आरोपी का शव विगत तीन दिनों से मर्च्युरी में,,,सीएएफ के जवान दो शिफ्टों में कर रहे सुरक्षा…

राजपुर। बलरामपुर जिले के कोतवाली थाना पुलिस के कस्टडी में हुए युवक की मौत का मामला सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को पूरे दिन जिला मुख्यालय बलरामपुर में विवाद चलता रहा और मृतक के परिजनों ने डेड बॉडी लेने से इनकार कर दिया। जिसके बाद सोमवार को शाम तकरीबन 6:30 पर पुलिस की टीम ने डेड बॉडी को राजपुर के मरच्ययूरी में फ्रीजर में रखवाया है।

बलरामपुर जिले में के धनंजय ज्वेलर्स में हुई चोरी के आरोपी की संदिग्ध परिस्थिति में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। मृतक उमेश सिंह मूलतः सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम नकना का रहने वाला था। उसे आठ अन्य आरोपियों के साथ चोरी के आरोप में हिरासत में लिया गया था। बलरामपुर पुलिस रविवार भोर को उसे लेकर वापस लौट रही थी तभी अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे तत्काल जिला अस्पताल बलरामपुर ले जाया गया जहाँ उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है। पुलिस का कहना है कि मृतक, सिकलसेल बीमारी से ग्रसित था। इसी बीच सोमवार को शव वाहन में पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच मृतक का डेड बॉडी को राजपुर लाया गया और उसे कड़ी सुरक्षा के बीच मरचुरी में फ्रीजर में रखवाया गया है।पिछले तीन दिनों से शव की सुरक्षा के लिए सीएएफ की चौथी बटालियन लगातार दस जवान दो शिफ्टों में दिन रात ड्यूटी में लगी हुई है।
परिजनों की मांग है कि पोस्टमार्टम दोबारा कराया जाए,दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज हो,और 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी जाए। मृतक के परिजन मंगलवार को पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के साथ आईजी से मिलने पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। इस पर आईजी ने कहा कि मामले की न्यायिक जांच पहले से जारी है और रिपोर्ट आने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।



