
राजपुर/शंकरगढ। सामरी क्षेत्र की विधायक उद्देश्वरी पैकरा के प्रयासों से शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शंकरगढ़ के नए भवन की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा वर्चुअल माध्यम से नए भवन की स्वीकृति दिए जाने के बाद क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने विधायक का काफिला रोककर उनका भव्य स्वागत किया और आभार जताया। वहीं, दौरे से लौटते समय विधायक का बच्चों के प्रति संवेदनशील और ममतामयी रूप भी देखने को मिला।
जर्जर भवन से मिलेगी मुक्ति,नए भवन की घोषणा से खुशी की लहर
वर्ष 1983 में स्थापित शासकीय बालक हायर सेकेंडरी स्कूल शंकरगढ़ का भवन लंबे समय से अत्यंत जर्जर स्थिति में था। छत का प्लास्टर गिरने से कई बार छात्र चोटिल भी हुए और बारिश के दिनों में कक्षाएं लगाना जोखिम भरा हो जाता था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि इस वर्ष स्कूल को दो पालियों में संचालित करना पड़ा। मीडिया द्वारा इस समस्या को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद सामरी विधायक उद्देश्वरी पैकरा ने मामले को गंभीरता से लिया।

विद्यालय परिवार व छात्रों ने जताया आभार
विधायक की पहल पर 28 अक्टूबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान स्कूल के नए भवन निर्माण की आधिकारिक घोषणा की। घोषणा के बाद क्षेत्र भ्रमण पर निकलीं विधायक उद्देश्वरी पैकरा का काफिला रोककर विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार एक्का, समस्त शिक्षक, अभिभावक एवं सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने फूल-माला और गुलदस्ते भेंट कर उनका स्वागत किया। विधायक ने भी बच्चों को माला पहनाकर शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर विधायक उद्देश्वरी पैकरा ने कहा “शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बच्चों के सुरक्षित भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए हम निरंतर कार्य करते रहेंगे।
प्राचार्य सुशील कुमार एक्का ने कहा कि जर्जर भवन के कारण शिक्षक और छात्र हमेशा भयभीत रहते थे, लेकिन विधायक के प्रयासों से अब बच्चों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। गौरतलब है कि इस विद्यालय का शैक्षणिक व खेल रिकॉर्ड उत्कृष्ट रहा है और हाल ही में यहां के 25 से अधिक छात्रों का चयन भारतीय सेना (अग्निवीर) में हुआ है।

सड़क पर दिखा मातृत्व प्रेम: खुद बस रुकवाकर बच्चों को सुरक्षित रवाना किया
कार्यक्रमों से वापसी के दौरान शाम लगभग 6:00 बजे बचवार पेट्रोल पंप के पास विधायक का एक और संवेदनशील रूप देखने को मिला। वहां 30 से 35 नन्हे बच्चे कतार में खड़े बस का इंतजार कर रहे थे। अंधेरा होता देख विधायक ने तत्काल अपना काफिला रुकवाया और बच्चों के पास पहुंचकर उनसे बातचीत की।
पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वे राजपुर, कमरी, सिलफिली, कर्रा, डीपाडीह और कुसमी जैसे दूर-दराज क्षेत्रों से शंकरगढ़ स्थित ‘लक्ष्य शिक्षण संस्थान’ में नवोदय, सैनिक स्कूल, एकलव्य और प्रयास आवासीय विद्यालय जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक कोचिंग के बाद वे बस से 20 से 25 किलोमीटर का सफर तय कर अपने घर लौटते हैं।

बस चालक को दिए सख्त निर्देश
विधायक ने नन्हे बच्चों के संघर्ष और उनके अभिभावकों के जज्बे की सराहना की। उन्होंने सभी बच्चों को चॉकलेट बांटी और स्वयं सड़क पर खड़े रहकर बस का इंतजार किया। बस आने पर उन्होंने हाथ देकर उसे रुकवाया, सभी बच्चों को सुरक्षित बस में बैठाया और बस चालक व कंडक्टर को निर्देशित किया कि इन बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाए और किसी भी स्थिति में बच्चों को छोड़े बिना सुरक्षित यात्रा कराई जाए।
विधायक के इस आत्मीय व ममतामयी व्यवहार की स्थानीय नागरिकों ने सराहना की। बच्चों ने भी विधायक का आभार व्यक्त किया और अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए।



