July 24, 2026 |

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चुनाव से ढ़ाई महीने पहले प्रत्याशी घोषित कर क्या बीजेपी ने बढ़त ले ली है,,,भाजपा के चुनावी दाँव से छत्तीसगढ़ की राजनीति में भारी उथल पुथल…

अंबिकापुर। बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति ने विधानसभा चुनाव के लगभग ढाई महीने पहले ही छत्तीसगढ़ की 21 और मध्य प्रदेश की 39 सीटों पर विधानसभा के प्रत्याशी घोषित कर नया दाव खेल दिया है। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दूसरे दिन 16 अगस्त को ही भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने अचानक से ये फैसला लेकर न केवल विरोधी पार्टी कॉंग्रेस को चौंका दिया बल्कि बीजेपी के लोगों को भी आश्चर्यचकित कर दिया। भाजपा के चुनावी इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि चुनाव के दो ढाई महीने पहले ही पार्टी ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हों। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, तथा राजस्थान में आगामी नवंबर माह में विधानसभा चुनाव होने हैं और सितंबर माह के दूसरे या तीसरे सप्ताह में आचार संहिता लगना सम्भावित है, ऐसे में भाजपा के इस चौंकाने वाले निर्णय को बीजेपी की नई चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कर्नाटक चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा आगामी चुनाव के मद्देनज़र हर कदम फूंक फूंक कर रखने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने नए चेहरों को मौका तो दिया था पर टिकट देर से घोषित होने के कारण प्रत्याशियों को जनता के बीच जाने का बहुत कम समय मिला था, इसके विपरीत कर्नाटक में कॉंग्रेस ने बहुत पहले ही अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए थे जिसका उन्हें चुनावी लाभ भी मिला। यदि छत्तीसगढ़ की बात करें तो भाजपा की ओर से पहले चरण में घोषित 21 नामों में ज्यादातर नए चेहरे हैं तथा उनमें महिलाओं की संख्या आनुपातिक रूप से ज्यादा हैं। यदि आगे भी यही अनुपात रहा तो शेष बची 69 सीटों की घोषणा में भी महिला प्रत्याशियों की संख्या ज्यादा रहने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। बीजेपी की नई चुनावी रणनीति में एक बात और निकलकर सामने आ रही है कि पिछले चुनाव में हारे हुए प्रत्याशियों को इस बार पार्टी टिकट देने के मूड में नहीं है, केवल नए नामों पर ही चर्चा कर निर्णय बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ले रही है। जिन 21 नामों की घोषणा बीजेपी ने की है वे सभी सीटें फ़िलहाल कॉंग्रेस के पास है ऐसे में भाजपा प्रत्याशियों को जनसंपर्क कर अपनी तैयारी करने का भरपूर समय मिलेगा। छत्तीसगढ़ में भाजपा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ बीजेपी सांसद विजय बघेल को उतारकर न केवल बड़ा दाव खेला है बल्कि भूपेश बघेल को अपने घर में ही घेरने की तगड़ी रणनीति तैयार की है। ज्ञात हो कि रिश्ते में भूपेश बघेल के भतीजे लगने वाले बीजेपी सांसद विजय बघेल ने 2008 के विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल को हराया था।भाजपा के घोषित 21 प्रत्याशियों में नए चेहरों को मौका दिए जाने का निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह व बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा टीम की नई राजनीतिक सोच का परिणाम है जो वर्तमान भाजपा संगठन को पूर्व संगठन से अलग पहचान दिलाता है। पिछले लोकसभा चुनाव में भी छत्तीसगढ़ के सभी सांसदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिए जाने का निर्णय बीजेपी की इसी ताक़तवर टीम का था जो सफल साबित हुआ। चुनाव आचार संहिता लगने से पहले ही प्रत्याशी घोषित करने का निर्णय बीजेपी का एक बड़ा दाव है जिससे वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में बीजेपी को कॉंग्रेस पर बढ़त मिलती दिख रही है। कॉंग्रेस खेमे सहित छत्तीसगढ़ की राजनीति में बीजेपी के इस अप्रत्याशित निर्णय से भारी उथल पुथल मची हुई है। अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व कॉंग्रेस पार्टी के ऊपर अपने प्रत्याशियों के नाम जल्द से जल्द घोषित करने का भारी दबाव होगा। छत्तीसगढ़ में कॉंग्रेस पार्टी जब अपनी पार्टी के अंदरूनी सर्वे में प्राप्त तीन मंत्रियों सहित 37 विधायकों की खराब रिपोर्ट पर चिंतन मनन कर उसका विकल्प ढूंढने में लगी थी ऐसे में बीजेपी ने अपने प्रत्याशी घोषित कर कॉंग्रेस को तगड़ा झटका दे दिया है। जाहिर है अब कॉंग्रेस को भी अपनी सोंच व रणनीति बदलनी ही पड़ेगी।
       बहरहाल पहले चरण के टिकट वितरण में 21 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा से जहां छत्तीसगढ़ भाजपा में खुशी की लहर है वहीं दूसरी ओर कॉंग्रेसी खेमे में चिंता की लकीरें साफ़ देखी जा सकती हैं। आने वाले दिनों में बीजेपी की दूसरी लिस्ट भी जल्द जारी होने की चर्चा के साथ साथ प्रदेश में यह चर्चा भी जोरों पर है कि मुख्यमंत्री की सीट पर सांसद विजय बघेल की घोषणा के बाद अब उपमुख्यमंत्री के खिलाफ़ कौन ??
                               ✍संतोष दास सरल
                       राजनीतिक विश्लेषक,अंबिकापुर

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