
राजपुर। वन परिक्षेत्र अंतर्गत गेउर हरितिमा परिसर में वन परिक्षेत्र स्तरीय तेंदूपत्ता शाखकर्तन एवं संग्रहण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य तेंदूपत्ता संग्राहकों को वैज्ञानिक पद्धति से शाखकर्तन, उचित संग्रहण, गुणवत्ता संरक्षण तथा वन संरक्षण संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान करना।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संग्राहक, फड़ अभिरक्षक, फड़ मुंशी एवं विभागीय अधिकारी,कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला में लघु वनोपज के उप प्रबंध संचालक संतोष पांडेय ने तेंदूपत्ता संग्रहण की संपूर्ण प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रस्तावना, फड़ों का चयन एवं शाखकर्तन, तेंदूपत्ता तोड़ाई, गड्डी बंधाई, संग्रहण केंद्र (फड़) पर खरीदी, पत्तों के उपचार, सिंचाई, बोरा भराई व सिलाई, परिवहन एवं गोदामीकरण तक की सभी व्यवस्थाओं को क्रमबद्ध तरीके से समझाया। साथ ही फड़मुंशी की नियुक्ति, उनके कर्तव्य, संधारित किए जाने वाले अभिलेख, फड़ अभिरक्षक के दायित्व, प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक एवं पोषक अधिकारियों की जिम्मेदारियों पर भी प्रकाश डाला गया। अग्रिम में क्रेता नियुक्त होने की स्थिति तथा संग्रहण समाप्ति उपरांत की जाने वाली कार्यवाही की भी जानकारी दी गई।

श्री पांडेय ने तेंदूपत्ता संग्राहकों हेतु बीमा योजना, संघ संचालित सामूहिक सुरक्षा योजना एवं शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उठाकर संग्राहक आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।
प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों ने पत्तों की सही उठाई-कटाई की विधि, निर्धारित मानक के अनुरूप बंडल तैयार करने की प्रक्रिया तथा संग्रहित पत्तों को सुरक्षित रखने के उपाय समझाए। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से शाखकर्तन करने पर वृक्षों को क्षति नहीं होती और अगले वर्ष भी उत्तम गुणवत्ता के पत्ते प्राप्त होते हैं। पत्तों की नमी, आकार एवं रंग बनाए रखने के लिए समय पर भंडारण और उचित देखरेख आवश्यक बताई गई।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों के बीच वन संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया गया। वनों में आगजनी की घटनाओं से बचाव, अवैध कटाई पर रोक तथा सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर विशेष चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि वन संपदा क्षेत्र की अमूल्य धरोहर है और इसकी सुरक्षा में जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
उपवनमंडलाधिकारी रविशंकर श्रीवास्तव ने कहा कि वनों को आग से बचाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने शासन के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और अनुशासित संग्रहण प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य हेतु फड़ अभिरक्षक रंजिता मिंज, सुनीता कुजूर, राजेश खलखो, लीलावती जायसवाल तथा फड़ मुंशी फुलसुंदरी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वन परिक्षेत्र अधिकारी महाजन लाल साहू,अशोक शुक्ला,अमित प्रताप सिंह, सुशील सिंह, मालती माझी, जिला अध्यक्ष लघु वनोपज सहकारी संघ लालसाय मिंज, समिति प्रबंधक सुरेश सोनी, नरसिंहपुर सरपंच शंभू राम, उपसरपंच सतीश सिंह सुनील भगत, सहित वन परीछेत्र अंतर्गत समस्त पोषक अधिकारी, फड अभिरक्षक फड मुन्शी स्व सहायता समुह के महिलाएं, वन धन समिति के सदस्यगण एवँ बड़ी संख्या में अधिकारी और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।



