
बलरामपुर/राजपुर। शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त करने के लिए शिक्षा मंत्री के स्पष्ट निर्देश जारी हुए एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बलरामपुर जिले के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास (आजाक) विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
संलग्नीकरण समाप्त करने के बजाय विभाग ने एक प्रधान पाठक को जनपद पंचायत कुसमी का प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) का दायित्व सौंप रखा है।इस संबंध में संलग्नीकरण समाप्ति के बीच प्रधान पाठक को जनपद कुसमी का प्रभार मिलने की खबर लगाई गई थी।समाचार के प्रकाशन के बाद सहायक आयुक्त, आजाक विभाग ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि मुन्ना लाल धुर्वे शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण समाप्त होने से पहले से ही आजाक विभाग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं तथा उनका वेतन-भत्ता आजाक विभाग द्वारा भुगतान किया जा रहा है।हालांकि, विभाग के इस स्पष्टीकरण के बाद कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े हो गए हैं।

यदि धुर्वे वास्तव में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, तो उनकी प्रतिनियुक्ति किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश से की गई? क्या सामान्य प्रशासन विभाग के प्रचलित नियमों के अनुरूप उनकी प्रतिनियुक्ति की स्वीकृति प्राप्त की गई है? प्रतिनियुक्ति की अवधि कितनी है? और यदि विभाग उन्हें प्रतिनियुक्त कर्मचारी मान रहा है, तो क्या उन्हें नियमानुसार देय प्रतिनियुक्ति भत्ता भी प्रदान किया जा रहा है?इन प्रश्नों का उत्तर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि प्रतिनियुक्ति वैध है, तो उससे संबंधित सभी सेवा शर्तों और वित्तीय लाभों का पालन किया जाना चाहिए।
वहीं यदि प्रतिनियुक्ति संबंधी वैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, तो यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि संबंधित अधिकारी किस प्रशासनिक आधार पर विभाग में कार्यरत हैं।अब इस पूरे मामले में विभाग द्वारा प्रतिनियुक्ति आदेश, सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति तथा प्रतिनियुक्ति भत्ते से संबंधित स्थिति सार्वजनिक किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला वास्तविक प्रतिनियुक्ति का है या संलग्नीकरण व्यवस्था को किसी अन्य स्वरूप में जारी रखने का।
प्रतिनियुक्ति संबंधी कोई आदेश प्राप्त नहीं हैं और ना ही आजाक विभाग के द्वारा कोई प्रतिनियुक्ति भत्ता प्रदाय किया जाता हैं वर्ष 2019 के सामान्य प्रशासन के आदेश के आधार पर प्रधान पाठक मुन्ना लाल धुर्वे को आजाक विभाग में प्रतिनियुक्ति माना जा रहा हैं।समीक्षा जायसवालसहायक आयुक्त आजाक बलरामपुर
5 मार्च 2019 के सामान्य प्रशासन वि
भाग के आदेश के तहत केवल अधीक्षक का दायित्व निभा रहे शिक्षकों को ही प्रतिनियुक्ति/प्रभार पर माना जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2019 के आदेश के अनुसार आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आश्रम शालाओं में कार्यरत अधीक्षक सह प्रधान पाठक के पद का नामकरण प्रधान पाठक किया गया तथा इन पदों को स्कूल शिक्षा विभाग को हस्तांतरित किया गया। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि जहां आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग में अधीक्षक का पृथक पद स्वीकृत है और उस पद पर नियमित भर्ती की प्रक्रिया प्रचलन में है, वहां पद भरे जाने तक वर्तमान में अधीक्षक का कार्य कर रहे व्यक्ति को ही अधीक्षक के पद पर यथास्थिति प्रतिनियुक्ति अथवा प्रभार पर माना जाएगा। अर्थात, आदेश का यह प्रावधान केवल उन शिक्षकों पर लागू होता है जो संबंधित आश्रम शालाओं में अधीक्षक का दायित्व निभा रहे हैं। अन्य पदों पर कार्यरत कर्मचारियों पर इस प्रावधान की स्वतः लागू होने की बात आदेश में उल्लेखित नहीं है।



