
बलरामपुर। जिले में संलग्नीकरण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। शिक्षा मंत्री के संलग्नीकरण समाप्त करने के निर्देशों के बावजूद आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास (आजाक) विभाग में वर्षों से संलग्न कुछ शिक्षक अब भी अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस नहीं लौटे हैं।

इसी बीच एक प्रधान पाठक को जनपद पंचायत कुसमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) का प्रभार दिए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि एक ओर शासन संलग्नीकरण समाप्त करने के निर्देश दे रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से शासन की मंशा पर प्रश्न उठ रहे हैं तथा संलग्न कर्मचारियों का मनोबल बढ़ने की बात कही जा रही है।

जानकारी के अनुसार, मुन्नालाल धुर्वे मूल रूप से प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ हैं। उन्हें पहले आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग में संलग्न कर पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास का प्रभारी अधीक्षक बनाया गया था। इसके बाद वर्ष 2024 में उन्हें आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास, रायपुर कार्यालय में संलग्न किया गया। वर्ष 2025 में उन्हें सहायक आयुक्त कार्यालय, बलरामपुर में क्षेत्र संयोजक का प्रभार सौंपा गया वहीं कलेक्टर कार्यालय बलरामपुर द्वारा 31 जुलाई को जारी आदेश के अनुसार उन्हें जनपद पंचायत कुसमी के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) का प्रभार दिया गया है। इस नियुक्ति के बाद जिले में संलग्नीकरण व्यवस्था और प्रशासनिक प्रभारों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
मुन्ना लाल धुर्वे पूर्व से हमारे यहां क्षेत्र संयोजक पद पर कार्यरत हैं और उनका वेतन आहरण हमारे कार्यालय से किया जाता रहा हैं इसलिए इन्हें विभागीय प्रतिनियुक्त माना जाएगा
समीक्षा जायसवाल,सहायक आयुक्त आजाक विभाग बलरामपुर



