
राजपुर। बलरामपुर वनमंडलाधिकारी आलोक कुमार बाजपेयी के पहल पर जिले के राजपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पतरापारा के गेल्हापानी गांव में पीवीटीजी वनधन विकास केंद्र के तहत सरसों, महुआ (डोरी) तेल मिल का शुभारंभ किया गया। इस तेल मिल का संचालन दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह पतरापारा द्वारा किया जाएगा, जिसमें पहाड़ी कोरवा समुदाय की 11 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सामरी विधायक उद्देश्वरी पैकरा ने फीता काटकर तेल मिल का उद्घाटन किया।
यह परियोजना जिला यूनियन बलरामपुर के अंतर्गत लगभग 3 लाख 70 हजार रुपये की लागत से स्थापित की गई है। वन धन विकास केंद्र पतरापारा (पीवीटीजी) के माध्यम से यह पहल आदिवासी समुदाय, विशेष रूप से अत्यंत पिछड़ी जनजाति के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस केंद्र के माध्यम से महुआ और सरसों से तेल निकालने की मशीन स्थापित की गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर ही वनोपज का प्रसंस्करण संभव हो सकेगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक उद्देश्वरी पैकरा ने कहा कि सरकार अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि जनजातीय समुदायों, विशेषकर पीवीटीजी वर्ग के उत्थान के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई योजनाओं के माध्यम से आदिवासी समुदाय को स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार हो सके।उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत पतरापारा के गेल्हापानी की पहाड़ी कोरवा बस्ती पहुंच मार्ग पर पुलिया के स्वीकृति दिलाई, इसके अलावा ग्रामीणों ने चंबोथा नाला में पुलिया की मांग किये तो विधायक ने मैं रात टार्च जलाकर देखी और पुलिया की स्वीकृति दिलाई ,पुलिया का निर्माण प्रारंभ हो चुका हैं।
कार्यक्रम में भाजपा जिला महामंत्री संजय सिंह ने कहा कि सरकार लगातार विकास कार्यों को गति दे रही है। इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि शिवनाथ जायसवाल, जिला सदस्य रवि प्रताप मराबी, भाजपा मंडल अध्यक्ष जगवंशी यादव, उपवन मंडलाधिकारी रविशंकर श्रीवास्तव, रेंजर अजय वर्मा ने संबोधित किया। कार्यक्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी अजय वर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में मंच संचालन भाजपा मंडल महामंत्री संतोष तिवारी एवं आभार प्रदर्शन पतरापारा सरपंच नन्हर कुमार ने किया।

इस तेल मिल की उत्पादन क्षमता प्रति घंटा 20 किलोग्राम तक है और एक दिन में लगभग 100 किलोग्राम सरसों की पेराई की जा सकती है। अनुमानित रूप से 3 किलोग्राम सरसों से 1 लीटर तेल प्राप्त होगा, जिससे प्रतिदिन लगभग 33 लीटर सरसों तेल उत्पादन संभव है। वहीं 3.5 से 4 किलोग्राम महुआ बीज से 1 लीटर महुआ तेल निकाला जा सकता है। इसके अलावा तेल निकालने के बाद सरसों की खली (पशु चारा) भी तैयार होती है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है।
वन धन विकास केंद्र पतरापारा वर्तमान में 15 स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 148 आदिवासी लाभार्थियों को जोड़कर कार्य कर रहा है। यह केंद्र न केवल स्थानीय उत्पादों को मूल्य संवर्धन प्रदान कर रहा है, बल्कि महिलाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। उत्पादित तेल की पैकेजिंग 500 मिलीलीटर और 1 लीटर के कंटेनरों में की जाएगी, जिससे स्थानीय बाजारों में इसकी बिक्री सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर प्रबंधक सुरेश सोनी, भाजपा मंडल महामंत्री बबलू यादव, सन्तोष तिवारी, सुरेश यादव, डिप्टी रेंजर अमृत प्रताप , सर्किल इंचार्ज अशोक शुक्ला, मालती मांझी, सरपंच ननहर आयाम,अमदरी सरपंच रामरतन नगेशिया, व ग्रामीण थे।



