November 6, 2026 |

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विकास खंड शिक्षा अधिकारी ने किया विभिन्न स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण,,,अनियमितता पाए जाने पर शिक्षकों को जारी हुआ नोटिस…

राजपुर। विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विभिन्न स्कूलों में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान स्कूलों में कई अनियमितताएं पाई गई जिसके बाद विकास खंड शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार गुप्ता ने संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

       राजपुर विकास खण्ड के अंतर्गत ज्योति प्राथमिक शाला जुगिमुड़ा कोदौरा में अनुदान प्राप्त शिक्षिका सुषमा टोप्पो के विरुद्ध भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत, प्रत्यक्षदर्शी कथनों एवं अभिलेखों के आधार पर यह पाया गया कि संबंधित शिक्षिका विद्यालय समय में नशा/मद्यपान की अवस्था में उपस्थित हुईं। इससे शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हुआ, विद्यार्थियों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हुआ तथा विद्यालय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965, अनुदान सहायता नियमों एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम का गंभीर उल्लंघन मानते हुए अंतिम चेतावनी जारी की है। शिक्षिका को सात दिवस में साक्ष्य सहित जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा निलंबन, सेवा समाप्ति अथवा अनुदान निरस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

      जाँच के दौरान 02 जनवरी 2026 को माध्यमिक शाला दुप्पी के आकस्मिक निरीक्षण में प्रधान पाठक सोमार साय पैकरा एवं शिक्षिका अमृता एक्का के कार्य में गंभीर शैक्षणिक लापरवाही पाई गई। निरीक्षण के दौरान शिक्षक डायरी अद्यतन नहीं पाई गई तथा कक्षा में विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर अपेक्षा के अनुरूप नहीं था। विभाग ने इसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन मानते हुए दोनों से सात दिवस में दस्तावेजों सहित स्पष्टीकरण मांगा है। इसी क्रम में प्राथमिक शाला दुप्पी के सहायक शिक्षक रामरतन सिंह, दीपक कुमार बघेल एवं अमर कुमारी के विरुद्ध भी कारण बताओ सूचना जारी की गई है। निरीक्षण में पाया गया कि शिक्षक डायरी अधूरी थी और बच्चों का शैक्षणिक स्तर संतोषजनक नहीं था। विभाग ने इसे कर्तव्य के प्रति उदासीनता और गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखते हुए स्पष्ट किया है कि संतोषजनक उत्तर न मिलने पर एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

      प्राथमिक शाला गढ़ौतापारा में 08 जनवरी 2026 को बीपीओ मरियानुस एक्का द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण में प्राथमिक शाला गढ़ौतापारा में प्रधान पाठक जेनेविवा तिर्की द्वारा स्वयं के पद का दुरुपयोग कर नियमविरुद्ध अवकाश स्वीकृति एवं उपस्थिति पंजी में भ्रामक प्रविष्टियां करने के गंभीर मामले सामने आए। अभिलेखों के परीक्षण में पाया गया कि शीतकालीन अवकाश के उपरांत समय पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया, स्वयं के लिए आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया गया तथा 07 एवं 08 जनवरी 2026 को बिना सक्षम अनुमति के पूर्णतः अनुपस्थिति रही। निरीक्षण में यह भी उजागर हुआ कि शिक्षक उपस्थिति पंजी में वास्तविक स्थिति के विपरीत प्रविष्टियां दर्ज की गईं, जो शासकीय अभिलेखों की शुचिता के विरुद्ध है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर कक्षा अनुरूप नहीं पाया गया, जिससे नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण अध्यापन के अभाव की पुष्टि हुई। विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 एवं अवकाश नियमों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए प्रधान पाठक को सात दिवस में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

       गढ़ौतापारा प्रकरण में प्रधान पाठक के साथ साथ संकुल समन्वयक पर भी गज गिरी है। संकुल स्तर पर पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण में लापरवाही बरतने के आरोप में संकुल प्राचार्य अरुण कुमार एवं संकुल समन्वयक अशोक कुमार जायसवाल को भी कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। विभाग का कहना है कि लंबे समय तक चली अनियमितताओं के बावजूद संकुल स्तर से नियमित निरीक्षण नहीं किया गया, उपस्थिति व अवकाश अभिलेखों की जांच नहीं हुई और उच्च कार्यालय को समय रहते जानकारी नहीं दी गई। इसे प्रशासनिक शिथिलता मानते हुए दोनों अधिकारियों से सात दिवस में जवाब तलब किया गया है।

     विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी अरविन्द कुमार गुप्ता ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता, शासकीय अनुशासन और बच्चों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। निरीक्षण में पाई गई अनियमितताओं पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। सभी संबंधितों को समय-सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है, किंतु जवाब असंतोषजनक होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जाएगी।

     इन कार्रवाइयों को शिक्षा विभाग द्वारा व्यवस्था सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विभाग का मानना है कि नियमित निरीक्षण, सख्त अनुश्रवण और जवाबदेही तय करने से ही शालाओं में अनुशासन, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। आने वाले दिनों में अन्य शालाओं में भी निरीक्षण तेज किए जाने के संकेत दिए गए हैं, ताकि शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।

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