
राजपुर। बलरामपुर जिले के राजपुर स्थित गेयूर नदी पर करीब 40 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुआ छठ घाट अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान यहां हजारों की तादाद में श्रद्धालु और व्रती पहुंचते हैं, लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद घाट की तकनीकी खामियों ने लोगों की मुश्किलें कम करने के बजाय और बढ़ा दी हैं। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग द्वारा कराए गए इस निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और अधिकारियों की मनमानी के सीधे आरोप लग रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज अनुविभाग स्तर के आला प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर औचक निरीक्षण करने पहुंचे। घाट की बदहाल स्थिति और निर्माण की खराब गुणवत्ता को देखकर सांसद ने अधिकारियों के समक्ष कड़ी नाराजगी जाहिर की।

मौके पर स्थिति का जायजा लेते हुए सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि विभाग ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर केवल कागजी ड्राइंग-डिजाइन के आधार पर निर्माण करा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय आयोजन समिति के लोगों को भी निर्माण के दौरान इस पर सक्रिय निगरानी रखनी चाहिए थी। इसके साथ ही सांसद ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकारते हुए कहा कि उन्हें भी निर्माण कार्य चलने के दौरान पहले ही मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए था।
लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी घाट का इस कदर बदहाल होना सीधे तौर पर शासकीय धन के दुरुपयोग और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है। जिस घाट को छठ व्रतियों की सहूलियत के लिए बनाया गया था, वही अब पर्व से ऐन पहले श्रद्धालुओं के लिए असुविधा और खतरे का सबब बन चुका है।
सांसद के कड़े तेवर के बाद अब स्थानीय लोगों की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि RES विभाग के दोषी अधिकारियों व ठेकेदार पर क्या कार्रवाई होती है और महापर्व से पहले घाट की खामियों को कब तक दुरुस्त किया जाता है।



